आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मानवता की एकता पर जोर देते हुए कहा कि राजनीति अब केवल व्यक्तिगत स्वार्थ तक सीमित हो गई है। उन्होंने समाज में अंतर-धार्मिक सद्भाव और निस्वार्थ सेवा के महत्व को रेखांकित किया।

  • मोहन भागवत ने कहा कि मानवता की मूल सच्चाई एकता है, जबकि अंतर केवल भ्रम हैं।
  • उन्होंने वर्तमान राजनीति की आलोचना करते हुए इसे 'स्वार्थ का खेल' बताया।
  • आरएसएस द्वारा भारत भर में 1.3 लाख से अधिक सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
  • उन्होंने धार्मिक भेदभाव के बिना निस्वार्थ सेवा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक हालिया संबोधन में मानवता और सामाजिक एकता के गहरे दर्शन को साझा किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के सभी समाजों का पारंपरिक ज्ञान एकता और प्रेम को ही अंतिम सत्य मानता है। भागवत के अनुसार, मानवीय मतभेद केवल अस्थायी भ्रम हैं, जबकि एकता ही मानवता की आधारभूत वास्तविकता है।

वर्तमान शासन व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए, भागवत ने कहा, "राजनीति अब स्वार्थ का खेल बन गई है"। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक सार्वजनिक नीतियों को सामूहिक कल्याण के बजाय व्यक्तिगत हितों के आधार पर बनाया जाएगा, तब तक वास्तविक सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक कार्रवाई समाज को नहीं बदल सकती, क्योंकि आधुनिक राजनीति पूरी तरह से जनमत पर निर्भर है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि भागवत का यह बयान वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह बयान न केवल राजनीतिक शुचिता पर सवाल उठाता है, बल्कि समाज के नैतिक ढांचे को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है।

राजनीति को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर सामूहिक कल्याण का माध्यम बनना चाहिए।

भागवत ने आरएसएस के सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ के स्वयंसेवक पूरे भारत में 1.3 लाख से अधिक सेवा प्रोजेक्ट चला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कार्य किसी राजनीतिक लाभ या सार्वजनिक प्रशंसा की लालसा के बिना किए जाते हैं। उन्होंने हरियाणा के दादरी में हुए विमान दुर्घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे स्वयंसेवकों ने बिना किसी धार्मिक भेदभाव के पीड़ितों की मदद की थी।

उन्होंने वैश्विक स्तर पर दीर्घकालिक परिवर्तन लाने के लिए सभी प्रशासनिक स्तरों पर निरंतर संवाद और निस्वार्थ सेवा के स्थानीय मॉडल विकसित करने का आह्वान किया। उनका लक्ष्य एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जहाँ पारंपरिक ज्ञान मानवीय व्यवहार और सार्वजनिक नीति को निर्देशित कर सके।

Frequently Asked Questions

1. मोहन भागवत ने राजनीति के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि राजनीति अब व्यक्तिगत स्वार्थ का खेल बन गई है, जिससे वास्तविक सामाजिक परिवर्तन बाधित हो रहा है।

2. आरएसएस कितने सेवा प्रोजेक्ट चला रहा है?
आरएसएस वर्तमान में भारत भर में 1.3 लाख से अधिक सेवा प्रोजेक्ट संचालित कर रहा है।

Did You Know?: आरएसएस के सेवा कार्य बिना किसी राजनीतिक प्रतिफल की अपेक्षा के पूरी तरह से स्वैच्छिक आधार पर किए जाते हैं।