पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने मांग की है कि परंदूर में रद्द किए गए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित 5700 एकड़ भूमि पर एक विशाल जलाशय बनाया जाए। उन्होंने चेन्नई के लिए एक दूसरे अंतरराष्ट्रीय मानक वाले हवाई अड्डे की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

  • परंदूर में अधिग्रहित 5700 एकड़ भूमि पर विशाल जलाशय बनाने का प्रस्ताव।
  • चेन्नई हवाई अड्डे के रनवे की चौड़ाई और बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग।
  • पल्लिकरणई आर्द्रभूमि (Marshland) को रामसर साइट घोषित करने की अपील।
  • कृषि भूमि के संरक्षण और औद्योगिक विस्तार पर चिंता।

पामल पार्टी (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने रविवार को एक महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि तमिलनाडु सरकार को परंदूर में रद्द किए गए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई 5700 एकड़ भूमि पर एक विशाल जल जलाशय (Water Reservoir) बनाना चाहिए। चेन्नई में आयोजित एक जागरूकता रैली के दौरान, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थित लगभग 33 झीलों को जोड़कर एक विशाल जलाशय बनाया जा सकता है, जो चेन्नई और आसपास के जिलों के लिए जीवनरक्षक साबित होगा।

चेन्नई के लिए दूसरे हवाई अड्डे की आवश्यकता

रामदास ने तर्क दिया कि चेन्नई को एक दूसरे हवाई अड्डे की तत्काल आवश्यकता है क्योंकि वर्तमान मीनाम्बक्कम हवाई अड्डा अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में विफल रहा है। उन्होंने तकनीकी बारीकियों का खुलासा करते हुए कहा, "बड़े विमानों के उतरने के लिए कम से कम 60 मीटर चौड़े रनवे की आवश्यकता होती है, लेकिन मीनाम्बक्कम का रनवे केवल 45 मीटर चौड़ा है। यही कारण है कि बेंगलुरु की तरह बड़े विमान चेन्नई में नहीं उतर पाते।"

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि मौजूदा हवाई अड्डे पर कार्गो सुविधाओं की भारी कमी है और जीएसटी मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण कंटेनर ट्रकों की आवाजाही भी बेहद कठिन है।

पर्यावरण और कृषि संरक्षण का मुद्दा

पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए, उन्होंने पल्लिकरणई आर्द्रभूमि (Pallikaranai Marshland) को आधिकारिक रूप से 'रामसर साइट' के रूप में अधिसूचित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परंदूर में उद्योगों को लाया जाता है, तो यह कृषि भूमि और पर्यावरण के लिए विनाशकारी होगा।

परंदूर की भूमि का उपयोग केवल औद्योगिक विकास के लिए नहीं, बल्कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चेन्नई जैसे महानगर के लिए जल प्रबंधन और हवाई कनेक्टिविटी दोनों ही भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। यदि परंदूर जलाशय योजना लागू होती है, तो यह न केवल जल संकट को कम करेगी बल्कि पारिस्थितिक संतुलन भी बनाए रखेगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चेन्नई की जल आपूर्ति और बुनियादी ढांचे का विकास दशकों से चुनौतीपूर्ण रहा है। पल्लिकरणई आर्द्रभूमि शहर के प्राकृतिक स्पंज के रूप में कार्य करती है, लेकिन शहरीकरण के कारण यह तेजी से सिकुड़ रही है।

Frequently Asked Questions

1. अंबुमणि रामदास ने परंदूर भूमि के लिए क्या सुझाव दिया है?
उन्होंने सुझाव दिया है कि एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहित 5700 एकड़ भूमि पर एक विशाल जलाशय बनाया जाए जो 33 झीलों को जोड़कर बने।

2. चेन्नई हवाई अड्डे के साथ मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या रनवे की कम चौड़ाई (45 मीटर बनाम आवश्यक 60 मीटर) और कार्गो सुविधाओं की कमी है।

Did You Know?: पल्लिकरणई आर्द्रभूमि चेन्नई के लिए एक प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली के रूप में कार्य करती है, जो बाढ़ को रोकने में मदद करती है।