ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के गठन के एक साल बाद भी शहर की प्रशासनिक व्यवस्था सुधरने के बजाय संघर्ष कर रही है। वार्डों की संख्या बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की कमी के कारण नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।

  • BBMP को भंग कर 5 नई नगर निगमों और GBA का गठन किया गया है।
  • वार्डों की संख्या 198 से बढ़कर 369 हो गई है, लेकिन कर्मचारी पुराने ढांचे के अनुसार ही हैं।
  • नगर निगमों में लगभग 40% पद खाली पड़े हैं।
  • नया कैडर और भर्ती (C&R) नियम अभी तक सरकार द्वारा अधिसूचित नहीं किया गया है।

बेंगलुरु के प्रशासनिक ढांचे में किए गए बड़े बदलावों के एक साल बाद, ज़मीनी हकीकत सुधार के दावों से बिल्कुल अलग नज़र आ रही है। ग्रेटर बेंगलुरु गवर्नेंस एक्ट, 2024 के लागू होने के बाद, पूर्ववर्ती BBMP को भंग कर दिया गया और उसकी जगह पांच नए नगर निगमों के साथ एक व्यापक निकाय, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) का गठन किया गया। हालांकि इस पुनर्गठन का उद्देश्य विकेंद्रीकरण के माध्यम से सूक्ष्म स्तर की समस्याओं को हल करना था, लेकिन संसाधनों की कमी ने इस लक्ष्य को अधर में लटका दिया है।

शहर के वार्डों की संख्या 198 से बढ़कर 369 कर दी गई है, जिससे प्रशासन को जनता के करीब आने की उम्मीद थी। लेकिन वास्तविकता यह है कि कार्यबल अभी भी पुराने 198 वार्डों वाले सेटअप के लिए ही तैनात है। इसके अलावा, रिक्तियों की दर लगभग 40% है, जिसका सीधा अर्थ है कि नई शासन संरचना का लाभ अभी तक आम नागरिकों तक नहीं पहुँच पाया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि केवल प्रशासनिक सीमाओं का विस्तार करने से शासन में सुधार नहीं होता; इसके लिए मानव संसाधन और जवाबदेही का होना अनिवार्य है। बेंगलुरु जैसे महानगर में, जहाँ बुनियादी ढांचा पहले से ही दबाव में है, कर्मचारियों की यह कमी कचरा प्रबंधन, सड़क मरम्मत और यातायात जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित कर रही है।

GBA कागजों पर एक आधुनिक अवधारणा है, लेकिन इसके पास कार्यान्वयन के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। - आर. राजगोपालन, संयोजक, बेंगलुरु गठबंधन।

नागरिकों की शिकायतों का स्वरूप भी बदल गया है। कोरमंगला और इंदिरा नगर जैसे क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि इंजीनियरों की कमी और उनके 'दोहरे कार्यभार' के कारण जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया है। कचरा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ड-वार सूक्ष्म योजना बनाने के लिए पर्याप्त इंजीनियरों की आवश्यकता है, जो वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण वे नए प्रयोग करने के बजाय केवल दैनिक संकटों (Daily Crises) को संभालने तक ही सीमित रह गए हैं। उदाहरण के लिए, कागदासुरपारा रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात सुधार जैसा एक सफल उदाहरण तो मिला, लेकिन संसाधनों के अभाव में ऐसे मामले बहुत कम हैं।

वर्तमान में सबसे बड़ी बाधा सरकार द्वारा नए कैडर और भर्ती (C&R) नियमों को अधिसूचित न करना है। GBA के मुख्य आयुक्त एम. माहेश्वर राव के अनुसार, समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और अब सरकार के अनुमोदन का इंतजार है। जब तक ये नियम लागू नहीं होते, तब तक सीधे भर्ती की प्रक्रिया शुरू होना कठिन है।

Did You Know?: बेंगलुरु के वार्डों की संख्या में लगभग 86% की वृद्धि की गई है, लेकिन प्रशासनिक स्टाफ में वैसी वृद्धि नहीं हुई है।

Frequently Asked Questions

1. GBA क्या है?
ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) एक व्यापक निकाय है जिसे बेंगलुरु के प्रशासन को विकेंद्रीकृत करने के लिए BBMP के स्थान पर बनाया गया है।

2. वर्तमान में मुख्य समस्या क्या है?
मुख्य समस्या वार्डों की बढ़ती संख्या के मुकाबले कर्मचारियों की भारी कमी और 40% रिक्त पद हैं।