राज्यसभा सांसद आर. कृष्णैया ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर पॉलिटेक्निक कॉलेजों को 'यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी' में विलय करने के फैसले को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से छात्रों के भविष्य और तकनीकी शिक्षा के ढांचे पर बुरा असर पड़ सकता है।

  • आर. कृष्णैया ने GO No. 97 को वापस लेने की मांग की है।
  • पॉलिटेक्निक कॉलेजों को 'यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी' में विलय करने का विरोध।
  • छात्रों द्वारा सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी।
  • तकनीकी शिक्षा के स्तर और करियर की संभावनाओं पर संकट का डर।

तेलंगाना के प्रमुख पिछड़ा वर्ग नेता और राज्यसभा सांसद आर. कृष्णैया ने रविवार को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर राज्य की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से पॉलिटेक्निक कॉलेजों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कृष्णैया ने सरकार से 'शक्ति योजना' के तहत पॉलिटेक्निक कॉलेजों को 'यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी' के साथ विलय करने की योजना को तत्काल त्यागने और GO No. 97 को वापस लेने का आग्रह किया है।

कृष्णैया ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि तेलंगाना भर में छात्र इस प्रस्तावित परिवर्तन के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार की चुप्पी को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और चेतावनी दी कि यदि मौजूदा पॉलिटेक्निक प्रणाली को कमजोर किया गया, तो इसका सीधा असर छात्रों की उच्च शिक्षा और उनके करियर की संभावनाओं पर पड़ेगा।

पॉलिटेक्निक बनाम आईटीआई: एक महत्वपूर्ण अंतर

सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि पॉलिटेक्निक शिक्षा को केवल आईटीआई (ITI) पाठ्यक्रमों या अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण के समान नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन साल का तकनीकी डिप्लोमा कार्यक्रम छात्रों को न केवल औद्योगिक रोजगार के अवसर प्रदान करता है, बल्कि ECET के माध्यम से बी.टेक में लेटरल एंट्री और उच्च अध्ययन के द्वार भी खोलता है।

पॉलिटेक्निक शिक्षा को कौशल प्रशिक्षण के साथ मिलाना छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के साथ एक बड़ा जोखिम है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, तेलंगाना की तकनीकी शिक्षा संरचना में कोई भी बड़ा बदलाव सीधे तौर पर राज्य की औद्योगिक कार्यबल क्षमता को प्रभावित करेगा। यदि पॉलिटेक्निक को केवल एक कौशल विकास केंद्र के रूप में देखा जाता है, तो इंजीनियरिंग क्षेत्र में जाने वाले हजारों छात्रों का मार्ग अवरुद्ध हो सकता है।

कृष्णैया ने मांग की है कि सरकार को पॉलिटेक्निक कॉलेजों को कमजोर करने के बजाय उन्हें बेहतर फंडिंग, उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप के माध्यम से मजबूत करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने SBTET मान्यता, डिप्लोमा की वैधता, परीक्षाओं, संकाय (faculty) और सरकारी नौकरियों के लिए पात्रता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता की मांग की है।

Did You Know?: पॉलिटेक्निक डिप्लोमा धारक ECET परीक्षा पास करके सीधे बी.टेक इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष में प्रवेश ले सकते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: आर. कृष्णैया किस सरकारी आदेश का विरोध कर रहे हैं?
उत्तर: वे GO No. 97 का विरोध कर रहे हैं, जो पॉलिटेक्निक कॉलेजों को यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी में विलय करने से संबंधित है।

प्रश्न 2: इस विलय का छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: कृष्णैया के अनुसार, इससे छात्रों की उच्च शिक्षा (जैसे बी.टेक में प्रवेश) और करियर की संभावनाओं को नुकसान पहुँच सकता है।