ICSSR के पूर्व अध्यक्ष जे.के. बजाज ने तर्क दिया है कि जनसंख्या में असमानता को देखते हुए परिसीमन प्रक्रिया को अगले 25 वर्षों तक स्थगित कर देना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक सभी राज्यों में जनसांख्यिकीय स्थिरता नहीं आ जाती, तब तक संघीय ढांचे को बचाना आवश्यक है।
- जे.के. बजाज ने परिसीमन (delimitation) पर 25 साल के अतिरिक्त फ्रीज की मांग की है।
- उनका तर्क है कि जनसंख्या स्थिरता आने तक 'एक व्यक्ति, एक वोट' के बजाय संघीय सिद्धांतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
- दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम होने का गहरा डर बना हुआ है।
भारतीय राजनीति के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक, लोकसभा सीटों का परिसीमन, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के पूर्व अध्यक्ष और रोहिणी आयोग के सदस्य जे.के. बजाज ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि संसद को परिसीमन पर लगी रोक को कम से कम अगले 25 वर्षों के लिए और बढ़ा देना चाहिए।
बजाज के अनुसार, भारत के विभिन्न राज्यों में जनसांख्यिकीय संक्रमण (demographic transition) अलग-अलग गति से हो रहा है। जहाँ केरल जैसे दक्षिणी राज्यों ने स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के कारण जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित कर लिया है, वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जनसंख्या का ग्राफ अभी भी भिन्न है। उनका तर्क है कि यदि अभी परिसीमन किया जाता है, तो यह उन राज्यों को दंडित करने जैसा होगा जिन्होंने सामाजिक-आर्थिक सुधारों के माध्यम से जनसंख्या नियंत्रण में सफलता प्राप्त की है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल सीटों की संख्या का नहीं है, बल्कि भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) की मजबूती का है। यदि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया जाता है, तो उत्तर भारत के राज्यों का दबदबा बढ़ जाएगा, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक आवाज दब सकती है। यह देश के राजनीतिक संतुलन को पूरी तरह से बदल सकता है।
'जब तक सभी राज्यों में जनसंख्या का स्तर स्थिर नहीं हो जाता, तब तक राज्यों के सापेक्ष हिस्से को बनाए रखना ही संघीय समझौते को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है।'
बजाज ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्री का यह आश्वासन कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं की जाएंगी, पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, असली मुद्दा 'सापेक्ष हिस्सेदारी' (relative share) का है। यदि कुल सीटों की संख्या बढ़ती है लेकिन उत्तर भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी अनुपात में बहुत अधिक हो जाती है, तो दक्षिणी राज्यों का प्रभाव स्वतः ही कम हो जाएगा।
जनसंख्या परिवर्तन के पीछे केवल परिवार नियोजन नहीं, बल्कि पोषण, स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बजाज का मानना है कि विकास और जनसंख्या नियंत्रण के बीच एक सीधा संबंध है, और परिसीमन नीति को इस विकासवादी यात्रा का सम्मान करना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. परिसीमन (Delimitation) क्या है?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं का पुननिर्धारण किया जाता है ताकि जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
2. दक्षिणी राज्यों को इससे क्या खतरा है?
दक्षिणी राज्यों में जनसंख्या वृद्धि दर कम रही है, इसलिए यदि सीटों का आवंटन नए जनगणना आंकड़ों पर आधारित होता है, तो उनकी राजनीतिक शक्ति कम हो सकती है।