हालिया चुनावों के विपरीत, भाजपा ने जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए आठ मुस्लिम उम्मीदवारों को नामांकित किया है। यह कदम अल्पसंख्यक मतदाताओं को लुभाने और विकास योजनाओं के प्रभाव को भुनाने की एक सोची-समझी रणनीति है।
- भाजपा ने जयपुर नगर निगम चुनाव के लिए 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को नामांकित किया, जो 2023 और 2024 के चुनावों के विपरीत है।
- 2020 के चुनावों में एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार रही शबाब जहाँ को वार्ड 117 से फिर से मौका मिला है।
- पार्टी 'विकास' और उज्ज्वला व पीएम आवास योजना जैसी केंद्रीय योजनाओं के दम पर अल्पसंख्यक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
- जयपुर में कुल 146 उम्मीदवार उतारे गए हैं, जिनमें 52 महिलाएं शामिल हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जयपुर नगर निगम के आगामी चुनावों के लिए मुस्लिम समुदाय से आठ उम्मीदवारों को नामांकित कर राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह निर्णय 2023 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों की रणनीति से बिल्कुल अलग है, जहाँ पार्टी ने किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था।
इन उम्मीदवारों में शबाब जहाँ शामिल हैं, जो 2020 के नागरिक चुनावों में पार्टी की एकमात्र मुस्लिम चेहरा थीं। पिछला चुनाव हारने के बावजूद, भाजपा ने वार्ड 117 से उन पर फिर भरोसा जताया है। अन्य नामांकित उम्मीदवारों में अफ़साना, मिज़ान मिर्ज़ा, रहीश मंसूरी, माजिद पठान, फरीउद्दीन, ज़ाकिर खान और शहनवाज़ अंसारी शामिल हैं। मतदान 9 और 11 सितंबर को होगा, जबकि परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक स्थानीय समायोजन नहीं है, बल्कि भाजपा की एक सोची-समझी कोशिश है ताकि पार्टी की उस छवि को बदला जा सके जिसे केवल एक विशेष वर्ग की पार्टी माना जाता है। नगर निगम स्तर पर अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उतारकर, भाजपा एक 'हाइपर-लोकल' समावेशी मॉडल का परीक्षण कर रही है। पार्टी अब वैचारिक विमर्श से हटकर 'विकास की राजनीति' की ओर बढ़ रही है।
स्थानीय चुनावों में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उतारना यह दर्शाता है कि भाजपा उन 'साइलेंट वोटर्स' को पकड़ना चाहती है जो पहचान की राजनीति के बजाय बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देते हैं।
उम्मीदवारों का मानना है कि सरकारी योजनाओं ने इस स्वीकार्यता का रास्ता खोला है। माजिद पठान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्ज्वला योजना जैसी स्कीमों का जमीनी स्तर पर मुसलमानों को लाभ मिला है, जिससे वे भाजपा का समर्थन करने के लिए अधिक तैयार हैं। इसी तरह, शबाब जहाँ ने अपने 15 साल के अनुभव और वार्ड के बुनियादी ढांचे के विकास को मुख्य मुद्दा बताया।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने इस कदम को संदेह की दृष्टि से देखा है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा केवल अपनी छवि को 'नरम' करने और खुद को मुस्लिम-विरोधी छवि से दूर दिखाने की कोशिश कर रही है। इस बार उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी असामान्य रही, जहाँ उम्मीदवारों को फोन पर सूचित किया गया ताकि आंतरिक कलह और निर्दलीय नामांकन को रोका जा सके।
अल्पसंख्यक नामांकन के अलावा, भाजपा की सूची में अन्य रणनीतिक बदलाव भी दिखे हैं। पार्टी ने 52 महिलाओं को टिकट दिया है और कांग्रेस छोड़कर आईं पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को नामांकित किया है। वहीं, वर्तमान मेयर कुसुम यादव की जगह राज्य उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को उतारा गया है, जिन्हें मेयर पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भाजपा ने पिछले बड़े चुनावों के बाद अब मुस्लिम उम्मीदवारों को क्यों उतारा?
पार्टी स्थानीय स्तर पर अपने समावेशी विकास एजेंडे को प्रदर्शित करना चाहती है और केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक वोट हासिल करना चाहती है।
प्रश्न 2: भाजपा खेमे में मेयर पद के लिए मुख्य दावेदार कौन है?
भाजपा राज्य उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को मेयर पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है, यदि पार्टी अपना नियंत्रण बनाए रखती है।