मणिपुर के डिप्टी सीएम लोसी डिकहो और आठ नागा विधायकों ने केंद्र सरकार से डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो वे भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे।

  • डिप्टी सीएम लोसी डिकहो ने साथी डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन पर कुकी उग्रवादियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है।
  • नागा विधायकों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कुकी-जो चरमपंथी समूहों के नेताओं की गिरफ्तारी की मांग की है।
  • यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 9 नागा विधायक भाजपा सरकार से अलग होने की धमकी दे रहे हैं।
  • नागा विधायकों ने 2008 के 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' (SoO) समझौते को रद्द करने की मांग की है।

मणिपुर की राजनीति में एक अभूतपूर्व मोड़ आया है, जहां सत्ता के शीर्ष पर बैठे दो नेताओं के बीच खुला युद्ध छिड़ गया है। डिप्टी सीएम लोसी डिकहो ने केंद्र सरकार से अपनी ही कैबिनेट सहयोगी और साथी डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। डिकहो का आरोप है कि किपगेन का कार्यालय कुकी उग्रवादी समूहों के साथ 'साठगांठ' कर रहा है, जो नागा नागरिकों की हत्याओं में शामिल रहे हैं।

यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि जातीय तनाव का प्रतिबिंब है। लोसी डिकहो और आठ अन्य नागा विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र भेजकर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। इस समूह में नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के पांच विधायक, भाजपा के दो, नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल है।

क्यों गहराया यह विवाद?

नागा विधायकों का मुख्य आक्रोश जून 10 को बरामद हुए छह नागा नागरिकों के क्षत-विक्षत शवों को लेकर है, जिन्हें अगवा किया गया था। पत्र में मांग की गई है कि कुकी-जो नेताओं और विशेष रूप से थांगबोई किपगेन (नेमचा किपगेन के पति और कुकी नेशनल फ्रंट के प्रमुख) को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना मणिपुर सरकार की आंतरिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। यदि नागा विधायक समर्थन वापस लेते हैं, तो भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार अल्पमत में आ सकती है, जिससे राज्य में पहले से मौजूद जातीय हिंसा और अस्थिरता और अधिक बढ़ सकती है। यह केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि नागा और कुकी समुदायों के बीच गहरे अविश्वास का परिणाम है।

मणिपुर में सत्ता के भीतर यह दरार दर्शाती है कि जातीय पहचान अब राजनीतिक गठबंधन से कहीं अधिक शक्तिशाली हो गई है।

विधायकों ने यह भी तर्क दिया कि 27 अगस्त को आईटी रोड पर हुए घात लगाकर किए गए हमले में चार और नागा पुरुषों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। उन्होंने केंद्र सरकार से 2008 में 25 कुकी-जो विद्रोही समूहों के साथ किए गए 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' (SoO) समझौते को तुरंत रद्द करने की मांग की है, क्योंकि उनके अनुसार इस समझौते का बार-बार उल्लंघन किया गया है।

क्या आप जानते हैं?: मणिपुर भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ विभिन्न जातीय समूहों के बीच जटिल राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अक्सर गठबंधन सरकारों का सहारा लिया जाता है।

1. नागा विधायकों की मुख्य मांग क्या है?
उनकी मुख्य मांग डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन और उनके पति थांगबोई किपगेन सहित कुकी उग्रवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और SoO समझौते को रद्द करना है।

2. इस विवाद का सरकार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
यदि 9 नागा विधायक समर्थन वापस लेते हैं, तो मणिपुर की मौजूदा भाजपा सरकार गिर सकती है।