पुडुचेरी के लोक निर्माण मंत्री मल्लाडी कृष्ण राव ने अपने दशकों पुराने रुख को बदलते हुए पहली बार केंद्र शासित प्रदेश के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग का समर्थन किया है। वित्तीय स्वायत्तता और वित्त आयोग के लाभों को इस बदलाव का मुख्य कारण बताया गया है।
- मंत्री मल्लाडी कृष्ण राव ने राज्य के दर्जे के खिलाफ अपने पुराने स्टैंड को बदला।
- केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि में भारी गिरावट (90% से घटकर 23%) को मुख्य कारण बताया।
- वित्त आयोग के माध्यम से फंड के हस्तांतरण (Devolution) से वित्तीय लाभ की उम्मीद।
- यानम, कराइकल और माहे जैसे अलग-थलग क्षेत्रों (Enclaves) की सुरक्षा की मांग।
पुडुचेरी की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है जब लोक निर्माण मंत्री मल्लाडी कृष्ण राव ने विधानसभा में पहली बार केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग का समर्थन किया। श्री राव, जो आंध्र प्रदेश के गोदावरी डेल्टा में स्थित यानम क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, अपने लंबे विधायी करियर में हमेशा इस मांग के खिलाफ रहे थे।
सोमवार को अपने विभाग के अनुदान मांगों पर जवाब देते हुए, AINRC और भाजपा के गठबंधन मंत्रिमंडल के सदस्य श्री राव ने स्पष्ट किया कि उनका पिछला विरोध केवल वित्तीय असुरक्षा और यानम की स्थिति को लेकर था। उन्होंने तर्क दिया कि पहले केंद्र सरकार से 90% अनुदान मिलता था, लेकिन अब यह घटकर कुल बजटीय परिव्यय का केवल 23% रह गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बदलाव केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि एक आर्थिक अनिवार्यता है। जब एक केंद्र शासित प्रदेश राज्य बनता है, तो वह सीधे वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत करों के हिस्सेदारी (Tax Devolution) का हकदार हो जाता है। श्री राव का मानना है कि राज्य बनने पर पुडुचेरी को प्रति वर्ष ₹300 करोड़ से ₹400 करोड़ का अतिरिक्त फंड मिल सकता है, जो वर्तमान अनुदान प्रणाली से कहीं अधिक है।
"पुडुचेरी का राज्य का दर्जा प्राप्त करना अब केवल राजनीतिक पहचान का मुद्दा नहीं, बल्कि वित्तीय उत्तरजीविता का प्रश्न बन गया है।"
मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पुडुचेरी भौगोलिक रूप से एक निरंतर क्षेत्र नहीं है। उन्होंने मांग की कि यदि राज्य का दर्जा दिया जाता है, तो कराइकल, यानम और माहे जैसे क्षेत्रों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए और उन्हें पुडुचेरी का अभिन्न हिस्सा बनाए रखा जाना चाहिए।
ऐतिहासिक रूप से, श्री राव की तटस्थता या राज्य के दर्जे के प्रस्तावों से दूरी बनाने के कारण उनकी काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, उनके इस नए रुख का मुख्यमंत्री एन. रंगसामी और प्रोटेम स्पीकर ने जोरदार स्वागत किया है।
Frequently Asked Questions
1. मंत्री मल्लाडी कृष्ण राव ने अपना स्टैंड क्यों बदला?
उन्होंने पाया कि केंद्र से मिलने वाला अनुदान 90% से गिरकर 23% रह गया है, जबकि राज्य बनने पर वित्त आयोग के माध्यम से अधिक फंड मिल सकता है।
2. राज्य बनने पर किन क्षेत्रों की सुरक्षा की बात कही गई है?
मंत्री ने यानम, कराइकल और माहे जैसे गैर-संलग्न क्षेत्रों (Enclaves) के हितों की रक्षा करने की मांग की है।