कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने KPSC भर्ती घोटाले में अपनी संलिप्तता के सबूत पेश करने की चुनौती देते हुए कहा है कि यदि वे दोषी पाए गए तो राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने एचडी कुमारस्वामी को भी चुनौती दी कि यदि भाजपा या जेडी(एस) के नेता इसमें शामिल मिले तो वे राजनीति से संन्यास लें।

  • प्रियांक खरगे ने KPSC घोटाले में सबूत मिलने पर पूरी तरह राजनीति छोड़ने की पेशकश की है।
  • गृह मंत्री ने एचडी कुमारस्वामी को चुनौती दी कि यदि भाजपा या जेडी(एस) नेता दोषी पाए गए तो वे इस्तीफा दें।
  • विवाद ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना में सहायक कार्यकारी इंजीनियरों (AEE) की नियुक्ति से संबंधित है।
  • आरोप है कि OMR शीट में हेरफेर किया गया और प्रश्न पत्र लीक किए गए।

कर्नाटक की राजनीति में उस समय उबाल आ गया जब गृह मंत्री प्रियांक खरगे और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के बीच कथित कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती घोटाले को लेकर तीखी बहस हुई। यह विवाद ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना के तहत सहायक कार्यकारी इंजीनियरों (AEE) की नियुक्ति में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।

सोमवार को एक साहसी कदम उठाते हुए, श्री खरगे ने घोषणा की कि यदि उनकी संलिप्तता का "रत्ती भर भी सबूत" पेश किया जाता है, तो वह राजनीति को पूरी तरह से त्यागने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि उनका परिवार भी राजनीति से दूर हो जाएगा। यह बयान श्री कुमारस्वामी द्वारा लगाए गए उन आरोपों के जवाब में आया है, जिनमें दावा किया गया था कि सिद्धरामैया सरकार के दौरान आरडीपीआर (RDPR) विभाग के प्रमुख रहते हुए खरगे इस घोटाले में शामिल थे।

प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए जेडी(एस) नेता से सवाल किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जांच शुरू करने का असली मकसद क्या है—उनका संदेह है कि यह भाजपा के बड़े चेहरों को बचाने की एक चाल है। उन्होंने निलंबित KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहुकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि कुमारस्वामी इस बात पर चुप क्यों हैं कि साहुकर की नियुक्ति पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने की थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह टकराव केवल प्रशासनिक चूक के बारे में नहीं है, बल्कि भविष्य के चुनावों से पहले नैतिक बढ़त हासिल करने की एक सोची-समझी राजनीतिक लड़ाई है। इस्तीफा देने की पेशकश करके, खरगे ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित चरित्र हनन के रूप में पेश करने की कोशिश की है।

KPSC घोटाला एक गहरी प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है जहाँ OMR शीट की सुरक्षा और परीक्षा की शुचिता राजनीतिक हथियार बन गए हैं।

विवाद का तकनीकी पहलू OMR शीट में हेरफेर से जुड़ा है। खरगे ने तर्क दिया कि इन दस्तावेजों का संरक्षण KPSC के पास था, न कि सरकार के पास। उन्होंने बताया कि एक पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट, जिसने सरकार के बजाय परीक्षा विंग को जिम्मेदार ठहराया, प्रशासन को इस साल फरवरी में मिली, जिससे KPSC की आंतरिक पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

दूसरी ओर, एच.डी. कुमारस्वामी ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए अपने आरोपों को दोहराया। उन्होंने दावा किया कि उम्मीदवारों को रिसॉर्ट्स में रखा गया था और उन्हें प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए गए थे। कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि वे खरगे के राजनीति छोड़ने की इच्छा नहीं रखते, बल्कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच चाहते हैं।

क्या आप जानते हैं?: KPSC कर्नाटक सरकार के लिए प्रमुख भर्ती एजेंसी है, और इसकी विश्वसनीयता से जुड़ा कोई भी घोटाला आमतौर पर हजारों उम्मीदवारों के विरोध और लंबी कानूनी लड़ाई का कारण बनता है।
विवाद का बिंदुप्रियांक खरगे का पक्षएचडी कुमारस्वामी का पक्ष
जिम्मेदारीKPSC परीक्षा विंग को जिम्मेदार ठहरायाRDPR विभाग के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया
सबूतदस्तावेजी सबूतों की मांग कीदावा किया कि दस्तावेज सौंप दिए गए हैं
राजनीतिक दांवदोषी पाए जाने पर राजनीति छोड़ने को तैयारपारदर्शी जांच की मांग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KPSC AEE घोटाला क्या है?
यह ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना में सहायक कार्यकारी इंजीनियरों की भर्ती के दौरान OMR शीट में हेरफेर और पेपर लीक से जुड़ा एक कथित घोटाला है।

इस विवाद में मुख्य राजनीतिक चेहरे कौन हैं?
इस विवाद के मुख्य चेहरे कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी हैं।