जम्मू-कश्मीर सरकार सीमित कार्यकारी शक्तियों के साथ संघर्ष कर रही है, ऐसे में स्थानीय नेताओं के बीच आंतरिक विभाजन राज्य के दर्जे और गरिमा की लड़ाई को कमजोर कर सकता है। नई दिल्ली के साथ जटिल संबंधों को संभालने के लिए एक एकजुट राजनीतिक मोर्चे की आवश्यकता है।
- उमर अब्दुल्ला और अन्य कश्मीरी नेताओं के बीच आंतरिक मतभेद संघीय गारंटी की मांग को कमजोर कर रहे हैं।
- उपराज्यपाल (LG) का कार्यालय निर्वाचित सरकार की तुलना में अत्यधिक शक्ति बनाए हुए है।
- सुरक्षा निर्णयों में स्थानीय राजनीतिक इनपुट की कमी से ऐसे प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं जो जनता को अलग-थलग कर देते हैं।
जम्मू और कश्मीर का राजनीतिक परिदृश्य वर्तमान में एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। जुलाई 2026 में, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके कैबिनेट ने संघीय गारंटी की बहाली की मांग को लेकर नई दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। इस घटना के बाद मेहबूबा मुफ्ती और सांसद रुहुल्लाह मेहदी द्वारा अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसने क्षेत्र के शीर्ष नेतृत्व के बीच गहरे मतभेदों को उजागर किया।
अक्टूबर 2024 में सत्ता में आने के बाद से, उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार के साथ संबंधों को सुधारने की एक संतुलित रणनीति अपनाई है। उन्होंने उम्मीद की थी कि एक नपे-तुले दृष्टिकोण से जम्मू-कश्मीर के लिए एक सम्मानजनक व्यवस्था पर बातचीत करना आसान होगा। हालांकि, श्रीनगर में उनके राजनीतिक विरोधियों ने इस व्यावहारिक दृष्टिकोण को 'कायरता' करार दिया है। आलोचकों का तर्क है कि 5 अगस्त 2019 के उन कानूनों को वापस लेना ही एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए जिन्होंने क्षेत्र के अर्ध-स्वायत्त दर्जे को छीन लिया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कश्मीरी नेतृत्व का वर्तमान विखंडन एक रणनीतिक शून्य पैदा करता है। जबकि ऑनलाइन चर्चाओं में वैचारिक शुद्धता को महत्व दिया जाता है, वास्तविकता यह है कि एक विभाजित विपक्ष को नई दिल्ली द्वारा आसानी से नजरअंदाज किया जा सकता है। ऐसे समय में जब भारत का व्यापक विपक्ष 'कश्मीर प्रश्न' में गहराई से शामिल होने से कतरा रहा है, स्थानीय नेतृत्व की एकजुटता की कमी उनकी सौदेबाजी की शक्ति को काफी कम कर देती है।
संरचनात्मक तनाव उपराज्यपाल (LG) की भूमिका से और बढ़ जाता है। हाल के चुनावों में नौकरशाही शासन को समाप्त करने के लिए भारी मतदान के बावजूद, LG कार्यालय महत्वपूर्ण कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करना जारी रखे हुए है। यह एक भ्रमित शासन संरचना बनाता है जहाँ निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावी रूप से शक्तिहीन कर दिया गया है, जो सहभागी लोकतंत्र के मूल तत्व को कमजोर करता है।
निर्वाचित विधायकों को शक्तिहीन करना न केवल संघवाद पर प्रहार है, बल्कि एक नाजुक सुरक्षा क्षेत्र में लोगों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बीच के महत्वपूर्ण संबंध को तोड़ने का जोखिम भी उठाता है।
इस व्यवस्था के खतरे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के निर्णयों में सबसे स्पष्ट रूप से दिखते हैं। LG को सलाह देने वाले गैर-स्थानीय नौकरशाह अक्सर क्षेत्र के जटिल राजनीतिक भूगोल से अनजान होते हैं। इसका एक उदाहरण अप्रैल 2025 में बैसरन आतंकवादी हमले के बाद देखा गया, जहाँ गुरि ठुकुरपोरा गाँव में घरों को ढहा दिया गया—यह वही गाँव है जो 1990 के दशक में भी भारत समर्थक रहा था। यदि निर्वाचित नेतृत्व सुरक्षा निर्णयों में शामिल होता, तो वह ऐसी कठोर कार्रवाई को रोकने में मदद कर सकता था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, जम्मू और कश्मीर एक राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में बदल गया। इस बदलाव ने नई दिल्ली में सत्ता का केंद्रीकरण किया और उस विशेष दर्जे को हटा दिया जिसने क्षेत्र को अपना अलग संविधान और झंडा रखने की अनुमति दी थी। यह संक्रमण गहन सुरक्षा लॉकडाउन और धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की ओर वापसी का गवाह रहा है, हालांकि पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने का वादा अब भी अधूरा है।
शासन शक्ति में बदलाव
| विशेषता | 2019 से पहले | वर्तमान स्थिति (2019 के बाद) |
|---|---|---|
| प्रशासनिक दर्जा | विशेष दर्जे वाला राज्य | केंद्र शासित प्रदेश |
| कार्यकारी शक्ति | मुख्यमंत्री / राज्य कैबिनेट | उपराज्यपाल (LG) |
| विधायी स्वायत्तता | उच्च (अनुच्छेद 370) | सीमित / केंद्रीकृत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कश्मीर के लिए इस समय राजनीतिक एकता क्यों महत्वपूर्ण है?
एकता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार एक ऐसे खंडित नेतृत्व को राज्य का दर्जा या संघीय गारंटी देने की संभावना कम रखती है जो एक साझा रणनीति पर सहमत नहीं हो सकता।
प्रश्न 2: जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल (LG) की क्या भूमिका है?
LG केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है और वर्तमान में प्रमुख निर्णय लेने वाले क्षेत्रों में निर्वाचित मुख्यमंत्री की तुलना में महत्वपूर्ण कार्यकारी शक्तियाँ रखता है।