निर्वाचन आयोग के 'फॉर्म 7' के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ रहा है। जानिए क्या है इसके कानूनी प्रावधान और जांच के बिना नाम हटाना संभव है या नहीं।

  • फॉर्म 7 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करने हेतु किया जाता है।
  • किसी भी नाम को हटाने से पहले निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) को अनिवार्य जांच और सुनवाई करनी होती है।
  • नाम हटाने के पांच वैध कारण हैं: मृत्यु, कम उम्र, स्थायी स्थानांतरण, पहले से नामांकित, या गैर-भारतीय नागरिक।

हाल ही में झारखंड के गोड्डा जिले से ऐसी खबरें आई हैं जहाँ बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) ने दावा किया है कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए गए हैं। इन फॉर्मों का उद्देश्य मतदाता सूची से कई नाम हटाना है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कई फॉर्म गलत प्रारूप में थे, जिसके कारण उन्हें खारिज कर दिया गया।

मतदाता सूची से नाम हटाने के कानूनी प्रावधान

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act), 1950 की धारा 22 के तहत, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को मतदाता सूची में सुधार करने या नाम हटाने का अधिकार दिया गया है। यह अधिकार वे स्वयं ले सकते हैं या किसी आवेदन पर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि, कानून यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी नाम मनमाने ढंग से न हटाया जाए।

नाम हटाने के लिए ERO को निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है: सबसे पहले संबंधित मतदाता को नोटिस जारी करना, उन्हें जवाब देने के लिए समय देना, और अंत में एक औपचारिक सुनवाई के बाद ही आदेश पारित करना।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ये कानूनी सुरक्षा उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि कोई गलत सूचना देकर किसी का नाम हटाने की कोशिश करता है, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।

निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की हेराफेरी रोकने के लिए केवल फॉर्म जमा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन अनिवार्य है।

फॉर्म 7 भरने की प्रक्रिया

मतदाता 'voters.eci.gov.in' पोर्टल या ECINet ऐप के माध्यम से ऑनलाइन फॉर्म 7 भर सकते हैं। आवेदन करते समय व्यक्ति को आपत्ति का एक ठोस कारण चुनना होता है।

कारण (Reason)विवरण (Description)
मृत्युमतदाता की मृत्यु हो चुकी है।
कम उम्रमतदाता की आयु 18 वर्ष से कम है।
स्थानांतरणमतदाता अब उस क्षेत्र का निवासी नहीं है।
नागरिकतामतदाता भारतीय नागरिक नहीं है।

हालांकि ऑनलाइन फॉर्म भरते समय किसी दस्तावेजी सबूत की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन आवेदक को एक कानूनी घोषणा पर हस्ताक्षर करना होता है कि दी गई जानकारी सत्य है। गलत जानकारी देने पर कानूनी दंड का प्रावधान है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

2018 से पहले, चुनावी प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग राज्यों के अपने सिस्टम थे। लेकिन ERONet पोर्टल के आने से पूरी प्रक्रिया का मानकीकरण (Standardization) हुआ है। 2025 में, चुनाव आयोग ने ECINet पोर्टल लॉन्च किया है जो लगभग 40 विभिन्न ऐप्स को एक मंच पर लाता है।

Did You Know?: फॉर्म 7 भरते समय यदि आप गलत जानकारी देते हैं, तो आप पर कानूनी मुकदमा चलाया जा सकता है क्योंकि इसमें एक शपथ पत्र शामिल होता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे का नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भर सकता है?
हाँ, लेकिन केवल उसी निर्वाचन क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता ही किसी अन्य मतदाता के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।

2. क्या ऑनलाइन फॉर्म जमा होते ही नाम कट जाता है?
नहीं, ऑनलाइन जमा होने के बाद BLO द्वारा फील्ड विजिट और ERO द्वारा जांच के बाद ही नाम हटाया जाता है।