इतिहास के पन्नों से एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है जब ई.वी. रामास्वामी (पेरियार), बी.आर. अंबेडकर और मोहम्मद अली जिन्ना ने कांग्रेस के खिलाफ एक साझा राजनीतिक मोर्चा बनाने का प्रयास किया था। यह लेख उनके 1940 के मुंबई मिलन और साझा राजनीतिक हितों का विश्लेषण करता है।
- 1940 में मुंबई में पेरियार, अंबेडकर और जिन्ना के बीच एक ऐतिहासिक बैठक हुई थी।
- तीनों नेताओं ने कांग्रेस के प्रभुत्व को कम करने के लिए साझा राजनीतिक हितों पर सहमति जताई थी।
- 'डे ऑफ डेलिवरेंस' (मुक्ति दिवस) के मुद्दे ने इन नेताओं को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हाल ही में तमिलनाडु के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के नीतिगत नोट में ई.वी. रामास्वामी (पेरियार) और बी.आर. अंबेडकर के संदर्भों के हटाए जाने से एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद ने इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान उस दौर की ओर खींचा है जब ये दिग्गज नेता एक साझा राजनीतिक लक्ष्य के लिए एक साथ आए थे।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 8 जनवरी 1940 को मुंबई में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में जस्टिस पार्टी के नेता पेरियार, दलितों के मसीहा डॉ. अंबेडकर और मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना शामिल हुए थे। उस समय, कांग्रेस सरकारों के इस्तीफे के बाद राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा था, जिसने इन तीनों नेताओं को एक अनूठा मंच प्रदान किया।
राजनीतिक अभिसरण के कारण
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इन नेताओं के बीच तालमेल का मुख्य कारण कांग्रेस के प्रति उनका साझा दृष्टिकोण था। 22 दिसंबर 1939 को जिन्ना द्वारा घोषित 'डे ऑफ डेलिवरेंस' (मुक्ति दिवस) का समर्थन करके, अंबेडकर और पेरियार ने स्पष्ट कर दिया था कि वे कांग्रेस के वर्चस्व के विरुद्ध खड़े हैं।
यह मुलाकात केवल व्यक्तिगत नहीं थी, बल्कि यह भारत के भविष्य के लिए अलग-अलग पहचानों की मांग का एक सामूहिक प्रयास था।
इस बैठक के दौरान, हिंदी भाषा को अनिवार्य बनाने के मुद्दे पर भी तीनों नेताओं के विचार मिलते थे। पेरियार के अनुसार, जिन्ना और अंबेडकर ने हिंदी थोपने की योजना का विरोध किया था, जिसे उन्होंने ब्राह्मणवादी संस्कृति को थोपने का एक प्रयास माना था।
अलग राज्यों की मांग और जटिलताएं
इतिहासकार यूजीन एफ. इर्शिक के अनुसार, इस दौरान 'द्रविड़नाडु' की मांग और महार, मुस्लिम तथा द्रविड़ों के लिए अलग राज्यों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई थी। हालांकि, सी.एन. अन्नादुरई जैसे नेताओं के संस्मरणों में इस गठबंधन के प्रयासों में आने वाली कड़वाहट और चुनौतियों का भी उल्लेख मिलता है।
| नेता | मुख्य राजनीतिक लक्ष्य | साझा मुद्दा |
|---|---|---|
| ई.वी. रामास्वामी | द्रविड़ राष्ट्र/गैर-ब्राह्मण अधिकार | कांग्रेस का विरोध |
| बी.आर. अंबेडकर | दलित अधिकार/पृथक निर्वाचन | कांग्रेस का विरोध |
| मोहम्मद अली जिन्ना | मुस्लिम अधिकार/पाकिस्तान की नींव | कांग्रेस का विरोध |
Frequently Asked Questions
1. पेरियार, अंबेडकर और जिन्ना क्यों मिले थे?
वे कांग्रेस के राजनीतिक प्रभाव को कम करने और अपने-अपने समुदायों के हितों की रक्षा के लिए एक साझा मोर्चा बनाने हेतु मिले थे।
2. 'डे ऑफ डेलिवरेंस' क्या था?
यह 22 दिसंबर 1939 का दिन था जिसे जिन्ना ने कांग्रेस सरकारों के इस्तीफे के बाद मुसलमानों के लिए 'मुक्ति दिवस' के रूप में मनाने का आह्वान किया था।