जेडी(एस) नेता और पूर्व विधायक के.बी. प्रसन्ना कुमार ने शिवमोग्गा निर्वाचन क्षेत्र में 2013-18 के बीच मतदाताओं की संख्या में हुई 'असामान्य' वृद्धि को लेकर चुनाव आयोग से जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में हेरफेर के कारण चुनावी परिणामों को प्रभावित किया गया होगा।
- 2013 से 2018 के बीच शिवमोग्गा में 40,436 नए मतदाताओं का 'असामान्य' इजाफा हुआ।
- पूर्व विधायक के.बी. प्रसन्ना कुमार ने चुनाव आयोग से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
- वर्तमान मतदाता सूची पुनरीक्षण में 56,432 मतदाता अनुपलब्ध, स्थानांतरित या मृत पाए गए हैं।
कर्नाटक के शिवमोग्गा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी शुचिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनता दल (सेकुलर) के नेता और पूर्व विधायक के.बी. प्रसन्ना कुमार ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2013 और 2018 के बीच निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में जो अचानक और असामान्य वृद्धि देखी गई, वह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकती है।
प्रसन्ना कुमार ने गुरुवार को शिवमोग्गा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डेटा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2013 के विधानसभा चुनाव में, जब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी, तब मतदाताओं की संख्या 2,15,937 थी। हालांकि, 2018 के चुनाव तक यह संख्या बढ़कर 2,56,373 हो गई—यानी मात्र पांच वर्षों में 40,436 मतदाताओं की 'असामान्य' वृद्धि। इसके विपरीत, 2023 के चुनाव में यह वृद्धि केवल 4,384 की रही, जो कि सामान्य श्रेणी में आती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि मतदाता सूची में इस तरह के बड़े पैमाने पर बदलाव सीधे तौर पर चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। यदि बड़ी संख्या में फर्जी या स्थानांतरित नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया में बाधा डालता है।
पूर्व विधायक ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि 2018 के चुनाव में उनकी हार के पीछे यह संख्यात्मक वृद्धि एक बड़ा कारण हो सकती है, जिसमें वे पूर्व भाजपा मंत्री के.एस. ईश्वरप्पा से हार गए थे। उन्होंने वर्तमान में चल रहे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) का हवाला देते हुए कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में भारी विसंगतियां हैं।
"चुनाव आयोग को मतदाताओं की संख्या में इस अचानक वृद्धि की जांच करनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।"
प्रसन्ना कुमार के अनुसार, वर्तमान मतदाता सूची के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल 56,432 मतदाता अनुपलब्ध (ASDD), स्थानांतरित या मृत हैं। इसमें 11,575 ऐसे मतदाता हैं जिनका पता नहीं चल सका है और 29,967 ऐसे लोग हैं जो स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
कर्नाटक की राजनीति में मतदाता सूची में विसंगतियों का मुद्दा पुराना है। पूर्व विधायक ने उदाहरण दिया कि मैसूरु के चामुंडेश्वरी निर्वाचन क्षेत्र में भी 2013-18 के दौरान इसी तरह की असामान्य वृद्धि देखी गई थी, जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को 2018 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
Frequently Asked Questions
1. के.बी. प्रसन्ना कुमार ने किस अवधि के लिए जांच की मांग की है?
उन्होंने मुख्य रूप से 2013 और 2018 के बीच मतदाताओं की संख्या में हुई 40,436 की अचानक वृद्धि के लिए जांच की मांग की है।
2. वर्तमान मतदाता सूची में क्या विसंगतियां पाई गई हैं?
वर्तमान ड्राफ्ट सूची के अनुसार, लगभग 56,432 मतदाता अनुपलब्ध, स्थानांतरित, डुप्लिकेट या मृत पाए गए हैं।