पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के साक्षरता दर में भारी उछाल के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। जगन ने केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोकेश द्वारा किए गए दावे भ्रामक और निराधार हैं।
- नारा लोकेश ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश की साक्षरता दर 2024 के 72.6% से बढ़कर 2026 में 82.1% हो गई है।
- वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने केंद्र के PLFS आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साक्षरता दर वास्तव में 71.4% है।
- जगन ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहा है और निजी स्कूलों में बढ़ रहा है।
आंध्र प्रदेश की राजनीति में साक्षरता के आंकड़ों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने वर्तमान शिक्षा मंत्री नारा लोकेश द्वारा किए गए साक्षरता दर के दावों को 'भ्रामक प्रचार' करार दिया है। जगन ने कहा कि लोकेश का यह दावा कि राज्य की साक्षरता दर 82.1% तक पहुंच गई है, पूरी तरह से आधारहीन है क्योंकि 2026 का कैलेंडर वर्ष अभी समाप्त भी नहीं हुआ है।
विवाद की जड़ में शिक्षा मंत्री नारा लोकेश का एक सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनके विभाग के प्रयासों और 'अक्षरा आंध्र' अभियान के कारण राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। लोकेश ने कहा कि 2024 में जब उन्होंने विभाग संभाला था, तब राज्य भारत में सबसे निचले स्तरों में से एक था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल आंकड़ों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह राज्य की शिक्षा प्रणाली की वास्तविक स्थिति और सरकारी नीतियों के प्रभाव को लेकर एक बड़ा राजनीतिक टकराव है। साक्षरता दर किसी भी राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास का मुख्य संकेतक होती है, और गलत आंकड़ों का उपयोग जनता के बीच गलत धारणा पैदा कर सकता है।
साक्षरता के आंकड़ों में इस तरह का अंतर नीतिगत विफलता या डेटा के हेरफेर की ओर इशारा करता है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
जगन मोहन रेड्डी ने केंद्र सरकार के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय के अनुसार, आंध्र प्रदेश की साक्षरता दर 71.4% के आसपास है। उन्होंने लोकेश पर आरोप लगाया कि सरकार जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
| स्रोत / वर्ष | साक्षरता दर (%) |
|---|---|
| नारा लोकेश का दावा (2026) | 82.1% |
| PLFS डेटा (2025) | 71.4% |
| PLFS डेटा (2023-24) | 72.6% |
| PLFS डेटा (2018-19) | 69.1% |
इसके अलावा, जगन ने UDISE+ के आंकड़ों का उपयोग करते हुए एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की नीतियों के कारण सरकारी स्कूलों में छात्रों का नामांकन 40.50 लाख (2023-24) से गिरकर 34.93 लाख (2025-26) हो गया है, जबकि निजी स्कूलों में नामांकन बढ़ रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश में शिक्षा का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। वाईएसआरसीपी शासन के दौरान बुनियादी ढांचे और मुफ्त शिक्षा पर जोर दिया गया था, जबकि वर्तमान टीडीपी-जेडीपी गठबंधन सरकार का ध्यान डिजिटल साक्षरता और निजी भागीदारी पर केंद्रित है।
Frequently Asked Questions
1. नारा लोकेश ने क्या दावा किया था?
लोकेश ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश की साक्षरता दर 2024 के 72.6% से बढ़कर 2026 में 82.1% हो गई है।
2. जगन मोहन रेड्डी ने किस डेटा का उपयोग किया?
जगन ने केंद्र के PLFS और UDISE+ रिपोर्ट का उपयोग करके लोकेश के दावों को चुनौती दी।