मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया है कि पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार शक्तिहीन हो चुकी है और सारी शक्तियां आर्मी चीफ असीम मुनीर के पास केंद्रित हो गई हैं।

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  • मौलाना फजलुर रहमान ने असीम मुनीर को पाकिस्तान का वास्तविक शासक बताया।
  • सरकार के पास से सैन्य नियुक्तियों और छुट्टियों के अधिकार छीनकर सेना को दिए गए।
  • विपक्ष ने सेना के बढ़ते हस्तक्षेप के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI-F) के प्रमुख और अनुभवी नेता मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान आर्मी चीफ असीम मुनीर की बढ़ती ताकत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक संयुक्त विपक्ष की बैठक के दौरान, 'मौलाना डीजल' के नाम से मशहूर रहमान ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार अब केवल नाममात्र की रह गई है और वास्तविक सत्ता असीम मुनीर के हाथों में है।

मौलाना रहमान ने आरोप लगाया कि संघीय सरकार की शक्तियां धीरे-धीरे सैन्य नेतृत्व को सौंपी जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि सेना, नौसेना और वायु सेना में नियुक्तियों के नियमों में बदलाव किए गए हैं। यहाँ तक कि अधिकारियों की छुट्टी मंजूर करने का अधिकार, जो पहले नागरिक सरकार के पास होता था, अब सैन्य कमांड के पास स्थानांतरित कर दिया गया है। रहमान ने इसे लोकतंत्र की हत्या और एक नई प्रकार की 'तानाशाही' करार दिया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पाकिस्तान में नागरिक सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ चुका है। यदि सेना के पास नागरिक प्रशासन के प्रशासनिक अधिकार आने लगते हैं, तो यह संवैधानिक ढांचे के लिए एक अस्तित्वगत संकट पैदा कर सकता है।

"पाकिस्तान में अब सरकार फैसले नहीं लेती, बल्कि फैसले लिए जाते हैं और सरकार उन्हें केवल लागू करती है।"

मौलाना रहमान ने आगे कहा कि असीम मुनीर अब केवल एक आर्मी चीफ नहीं रह गए हैं, बल्कि वे एक तरह से 'डिफेंस चीफ' और पीएम के सलाहकार की भूमिका भी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सेना प्रमुख ही कैबिनेट की बैठकों में शामिल होंगे, तो स्वतंत्र कैबिनेट की क्या भूमिका रह जाएगी?

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मौलाना फजलुर रहमान का राजनीतिक सफर 1988 में जनरल जिया-उल-हक के मार्शल लॉ के खिलाफ संघर्ष से शुरू हुआ था। चार दशकों से राजनीति में सक्रिय रहमान को पाकिस्तान का 'किंगमेकर' माना जाता है। उनका यह हमला पाकिस्तान के उस इतिहास की याद दिलाता है जहाँ सैन्य हस्तक्षेप ने बार-बार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बाधित किया है।

रहमान ने 1971 के युद्ध का जिक्र करते हुए पाकिस्तानी सेना की विश्वसनीयता पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सेना का झूठ बोलने का पुराना इतिहास रहा है, जैसा कि जनरल याह्या खान के समय देखा गया था।

Did You Know?: पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के कारण पिछले कुछ दशकों में कई बार सैन्य शासन और नागरिक शासन के बीच सत्ता का संघर्ष देखा गया है।

Frequently Asked Questions

1. मौलाना फजलुर रहमान ने असीम मुनीर पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया है कि असीम मुनीर ने नागरिक सरकार की शक्तियों को छीन लिया है और वे अब देश के वास्तविक शासक बन गए हैं।

2. शहबाज शरीफ सरकार की वर्तमान स्थिति क्या है?
विपक्ष के अनुसार, शहबाज सरकार के पास निर्णय लेने की शक्ति नहीं बची है और वे पूरी तरह से सैन्य नेतृत्व पर निर्भर हैं।