मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 'प्रजासेवा' विभाग के माध्यम से सरकार को सीधे जनता के दरवाजे तक पहुँचाने की घोषणा की है। इस पहल के तहत, मंत्रियों को महीने में दो बार जिला स्तर पर जनसुनवाई करनी होगी।

  • प्रजासेवा कार्यक्रम के तहत मंत्री महीने में दो बार (पहले और तीसरे शनिवार) जिला स्तर पर जनसुनवाई करेंगे।
  • शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सहित तीन मंत्री शिक्षक दिवस के कारण इस लॉन्च में शामिल नहीं हो पाएंगे।
  • सरकार का लक्ष्य समस्याओं का मौके पर समाधान करना और शासन को जनता के द्वार तक ले जाना है।

बेंगलुरु/बेलगावी: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य में शासन की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और जनोन्मुख बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। शुक्रवार को बागलकोट जिले के कुडल संगम में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए, मुख्यमंत्री ने बताया कि 'प्रजासेवा' विभाग के सार्वजनिक शिकायत निवारण कार्यक्रम के शुभारंभ में तीन मंत्रियों को छोड़कर राज्य के सभी मंत्री भाग लेंगे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन तीन मंत्रियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे इस लॉन्च में शामिल नहीं हो पाएंगे। इनमें प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री शामिल हैं, क्योंकि उन्हें शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों में व्यस्त रहना है। हालांकि, शेष सभी मंत्रियों के लिए अपने-अपने जिलों में व्यक्तिगत रूप से शिकायत सत्रों की अध्यक्षता करना अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रशासनिक ढांचा और कार्यान्वयन

नई व्यवस्था के तहत, मंत्रियों को हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को जिला स्तर पर शिकायत निवारण सत्रों की अध्यक्षता करनी होगी। शिवकुमार ने निर्देश दिया कि मंत्रियों को केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें प्रत्येक तालुक और उसके बाद 'होबली' स्तर तक जाकर लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना चाहिए। इसके साथ ही, विधायकों को पंचायत स्तर पर लोगों से मिलने और समस्याओं को हल करने के निर्देश दिए गए हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम नौकरशाही की बाधाओं को कम करने और सरकार और नागरिक के बीच की दूरी को पाटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जब उच्च स्तरीय पदाधिकारी सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में जाते हैं, तो इससे न केवल डेटा की सटीकता बढ़ती है, बल्कि जमीनी स्तर पर नीति निर्माण में भी सुधार होता है।

प्रजासेवा केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह शासन को 'ड्राइंग रूम' से निकालकर 'डोरस्टेप' तक लाने की एक रणनीतिक कोशिश है।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इस विभाग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सुनना और उनका मौके पर ही समाधान खोजना है। इस पहल का राज्य स्तरीय शुभारंभ शनिवार को कुडलगी में किया जाएगा।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने बागलकोट जिले के शिरूर गांव में किसान अंदनेप्पा कोटि के खेत में लाल चना (red gram) की फसलों का निरीक्षण भी किया, जो कृषि क्षेत्र के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: प्रजासेवा कार्यक्रम कब आयोजित किया जाएगा?
उत्तर: मंत्रियों द्वारा जिला स्तर पर सत्र हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को आयोजित किए जाएंगे।

प्रश्न 2: क्या सभी मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल होंगे?
उत्तर: नहीं, शिक्षक दिवस की जिम्मेदारियों के कारण तीन मंत्री इस लॉन्च में शामिल नहीं हो पाएंगे।

Did You Know?: कर्नाटक सरकार अब शासन को सीधे गांवों के 'होबली' स्तर तक ले जाने की योजना बना रही है ताकि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक मदद पहुँच सके।