अंध्र प्रदेश कांग्रेस ने दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में दो मुस्लिम महिला पत्रकारों के कथित हमले की कड़ी निंदा की और जिम्मेदार अधिकारियों की सस्पेंशन व निष्पक्ष जांच की मांग की।

  • एपी कांग्रेस ने दो महिला पत्रकारों के हमले की कड़ी निंदा की
  • साकेत पुलिस स्टेशन में जिम्मेदार अधिकारियों की सस्पेंशन की मांग
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की अपील

घटना का विवरण

अंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति के उपाध्यक्ष कोलानुकोंडा शिवाजी ने रविवार को विज़यावाड़ा के धरना सेंटर में आयोजित प्रदर्शन में बताया कि दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में दो युवा मुस्लिम महिला पत्रकार, शमीं खान और नफ़ीस खान, को अवैध रूप से हिरासत में लेकर तीसरे‑डिग्री की विधियों से पीटा गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने लाठी से मारते हुए महिलाओं को चलने‑फिरने में असमर्थ बना दिया।

राजनीतिक संदर्भ

शिवाजी ने कहा कि मोदी सरकार के तहत सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को दबाने, झूठे केस दर्ज करने और कठोर कानूनों का प्रयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। उन्होंने भाजपा और उसके गठबंधन पार्टियों की महिला सुरक्षा के नारे (बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ) को उजागर किया, जबकि वास्तविक में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा नहीं की जा रही।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that attacks on journalists, especially women from minority communities, signal a broader erosion of democratic norms in India, potentially influencing international perception and foreign policy toward the country.

"सामुदायिक तनाव को बढ़ावा देना लोकतंत्र के लिए घातक है," मानवाधिकार विशेषज्ञ डॉ. रवीना सिंह ने कहा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा का इतिहास लंबा है, विशेषकर धार्मिक या राजनीतिक तनाव के समय। 2020 में दिल्ली में एक पत्रकार पर हमला और 2022 में जम्मू में एक महिला रिपोर्टर की गिरफ्तारी ने पहले ही इस प्रवृत्ति को उजागर किया था। इस प्रकार की घटनाएँ प्रेस की स्वतंत्रता और महिलाओं की सुरक्षा दोनों को खतरे में डालती हैं।

Did You Know?: भारत में 2023 में पत्रकारों पर हुए हिंसात्मक हमलों की संख्या 15% बढ़ी, जो पिछले पाँच वर्षों में सबसे अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच शुरू हुई है?

उत्तर: अभी तक कोई आधिकारिक जांच नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री से त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्रश्न 2: इस घटना ने अन्य पत्रकारों पर क्या प्रभाव डाला है?

उत्तर: कई पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और प्रेस फ्रिडम संगठनों ने इस मामले में समर्थन की घोषणा की है।