ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) में वित्तीय संकट के कारण वार्ड विकास निधि के वितरण को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। पार्षदों ने राज्य सरकार और निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए काले कपड़े पहनकर अपना असंतोष व्यक्त किया है।

  • वार्ड विकास निधि (2026-27) के वितरण में देरी से पार्षदों में भारी नाराजगी।
  • पार्षदों ने राज्य सरकार और GCC के खिलाफ काले कपड़े पहनकर विरोध जताया।
  • GCC ने 'तरलता की समस्या' (Liquidity Issue) को फंड की कमी का मुख्य कारण बताया।
  • आगामी मार्च 2027 के स्थानीय निकाय चुनावों से पहले फंड जारी करने की मांग।

चेन्नई: ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) में वित्तीय संकट और वार्ड विकास निधि के गैर-वितरण ने राजनीतिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। 28 अगस्त, 2026 को आयोजित परिषद बैठक के दौरान, विभिन्न राजनीतिक दलों के पार्षदों ने राज्य सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया।

पार्षदों का मुख्य आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित 'पार्षद निधि' (Ward Development Funds) अभी तक जारी नहीं की गई है। यह स्थिति तब पैदा हुई है जब मार्च 2027 में होने वाले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की आहट सुनाई देने लगी है। पार्षदों का तर्क है कि बिना फंड के वे अपने वार्डों में बुनियादी विकास कार्य करने में असमर्थ हैं।

विकास कार्यों पर संकट और बढ़ता विवाद

GCC के कराधान और वित्त समिति की अध्यक्ष सरबजया दास ने स्पष्ट किया कि फंड का आवंटन अग्रिम रूप से नहीं किया जाता है। उन्होंने बताया कि पार्षदों को फरवरी तक परियोजनाओं के प्रस्ताव जमा करने होते हैं, जिसके बाद ही अनुमानित बजट के आधार पर आवंटन होता है। हालांकि, पार्षदों का कहना है कि नई सरकार के आने के बाद से कोई नया आवंटन नहीं हुआ है।

विवाद का एक बड़ा पहलू 'उपयोग किए गए फंड' के आंकड़ों में छिपा है। GCC के अनुसार, 2026-27 के लिए लगभग 25% फंड का उपयोग दिखाया गया है, लेकिन पार्षदों ने इस दावे को खारिज कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह 25% उपयोग पिछले वर्षों के बिलों के भुगतान से संबंधित हो सकता है, न कि वर्तमान वर्ष के नए आवंटन से।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल वित्तीय विवाद नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले शक्ति संतुलन का खेल है। यदि वार्ड विकास निधि समय पर जारी नहीं की जाती है, तो इससे न केवल बुनियादी ढांचे (जैसे सड़क और ड्रेनेज) का काम प्रभावित होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता भी बढ़ सकती है।

फंड की कमी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच का यह अंतर शहरी शासन की दक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उप-महापौर एम. मगेश कुमार ने चेतावनी दी है कि मानसून के दौरान सड़क मरम्मत और जल निकासी जैसे आपातकालीन कार्य रुक गए हैं क्योंकि वार्ड फंड उपलब्ध नहीं है। हालांकि, GCC का तर्क है कि नए वादे करना वर्तमान वित्तीय स्थिति में संभव नहीं है क्योंकि निगम पहले से ही देनदारियों से जूझ रहा है।

Did You Know?: वार्ड विकास निधि की राशि समय के साथ बढ़ी है, जो 2022 में ₹35 लाख से बढ़कर 2025 में ₹60 लाख प्रति पार्षद हो गई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: पार्षद काला कपड़ा क्यों पहन रहे हैं?
उत्तर: पार्षद राज्य सरकार और GCC द्वारा वार्ड विकास निधि जारी न करने के विरोध में काला कपड़ा पहनकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रश्न 2: फंड की कमी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: GCC अधिकारियों के अनुसार, निगम वर्तमान में 'तरलता की समस्या' (Liquidity Issue) का सामना कर रहा है।