जन सेना पार्टी के सांसद लिंगमनेनी रमेश ने केंद्र सरकार से अमरावती में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की बेंच स्थापित करने का आग्रह किया है ताकि आंध्र प्रदेश के करदाताओं को राहत मिल सके।
- सांसद लिंगमनेनी रमेश ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को पत्र लिखा।
- अमरावती में ITAT बेंच की स्थापना और 8 जिलों को इसके दायरे में लाने की मांग।
- वर्तमान में कई जिलों के करदाताओं को हैदराबाद और विशाखापट्टनम की यात्रा करनी पड़ती है।
जन सेना पार्टी (JSP) के सांसद लिंगमनेनी रमेश ने केंद्र सरकार के कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को एक औपचारिक पत्र लिखकर आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की एक नई बेंच स्थापित करने का अनुरोध किया है। सांसद ने विशेष रूप से मांग की है कि गुंटूर, कृष्णा, अनंतपुर, चित्तूर, कडप्पा, कुरनूल, नेल्लोर और प्रकाशम जिलों को इस प्रस्तावित बेंच के अधिकार क्षेत्र में लाया जाए।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम में एक बेंच कार्यरत है, जिसका अधिकार क्षेत्र पूर्व गोदावरी, गुंटूर, कृष्णा, श्रीकाकुलम, विशाखापट्टनम, विजयनगरम और पश्चिम गोदावरी जिलों तक सीमित है। श्री रमेश ने स्पष्ट किया कि यह वर्तमान व्यवस्था अविभाजित आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय सीमाओं पर आधारित थी, जिसे राज्य के विभाजन के बाद भी यथावत रखा गया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मांग केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि राज्य के पुनर्गठन के बाद न्यायिक विकेंद्रीकरण की एक आवश्यक प्रक्रिया है। जब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए अलग-अलग उच्च न्यायालय स्थापित किए गए, तो यह स्वाभाविक था कि अन्य अर्ध-न्यायिक निकायों जैसे ITAT का भी पुनर्गठन किया जाए। इससे न केवल करदाताओं का समय बचेगा, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी।
अमरावती में ITAT बेंच की स्थापना से करदाताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और वकीलों के लिए न्याय तक पहुंच आसान होगी और यात्रा व्यय में भारी कमी आएगी।
सांसद ने अपने पत्र में तर्क दिया कि अमरावती भौगोलिक रूप से केंद्र में स्थित है और कई जिलों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यदि यहां बेंच स्थापित होती है, तो मध्य और दक्षिण आंध्र प्रदेश के करदाताओं, अपीलकर्ताओं, अधिवक्ताओं और अधिकृत प्रतिनिधियों को विशाखापट्टनम या हैदराबाद जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
ऐतिहासिक रूप से, राज्य के विभाजन के बाद कई प्रशासनिक कार्यालय अभी भी हैदराबाद में स्थित हैं या उनके क्षेत्राधिकार ओवरलैप करते हैं। इस कदम से कर प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और स्थानीय स्तर पर विवादों का निपटारा संभव हो सकेगा।
| विशेषता | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित बदलाव |
|---|---|---|
| मुख्य केंद्र | विशाखापट्टनम/हैदराबाद | अमरावती |
| पहुंच | सीमित और लंबी यात्रा | केंद्रीय और सुलभ |
| क्षेत्राधिकार | विभाजन पूर्व आधारित | राज्य पुनर्गठन आधारित |
Frequently Asked Questions
1. ITAT बेंच की मांग क्यों की जा रही है?
ताकि आंध्र प्रदेश के करदाताओं को अपनी अपीलों के लिए हैदराबाद या विशाखापट्टनम की लंबी यात्रा न करनी पड़े और समय व धन की बचत हो।
2. किन जिलों को अमरावती बेंच के अंतर्गत लाने का प्रस्ताव है?
गुंटूर, कृष्णा, अनंतपुर, चित्तूर, कडप्पा, कुरनूल, नेल्लोर और प्रकाशम जिलों को।