तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी सुदर्शन रेड्डी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के लिए तीन सप्ताह के विस्तार की मांग की है। लगभग 40 लाख नोटिसों का वितरण अभी भी लंबित है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में देरी की संभावना है।
- तेलंगाना सीईओ ने मतदाता सूची संशोधन (SIR) के लिए 3 सप्ताह के विस्तार का अनुरोध किया है।
- लगभग 40 लाख (43%) नोटिस अभी भी वितरित किए जाने बाकी हैं।
- हैदराबाद और आसपास के जिलों में नोटिस वितरण का काम सबसे अधिक प्रभावित है।
- AI का उपयोग मतदाता सूची में विसंगतियों की पहचान करने के लिए किया जा रहा है।
तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) सी सुदर्शन रेड्डी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के लिए दो से तीन सप्ताह के विस्तार की मांग की है। यह मांग भारी संख्या में लंबित नोटिसों और अब तक पूरी न हुई सुनवाई के कारण की गई है।
वर्तमान समयसीमा के अनुसार, दावों और आपत्तियों का निपटारा 15 अक्टूबर तक होना था और अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर को प्रकाशित होनी थी। यदि आयोग विस्तार की अनुमति देता है, तो अंतिम मतदाता सूची नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में प्रकाशित होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने भी निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया था।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की आधारशिला है। यदि नोटिस समय पर नहीं पहुँचते हैं, तो पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। तेलंगाना में 92.8 लाख नोटिस जारी किए गए थे, जिनमें से केवल 57% ही वितरित हो पाए हैं।
मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने की यह प्रक्रिया जितनी सटीक होगी, आगामी चुनावों की पारदर्शिता उतनी ही अधिक सुनिश्चित होगी।
डेटा के अनुसार, नोटिस वितरण में सबसे बड़ी चुनौती शहरी क्षेत्रों में देखी जा रही है। हैदराबाद, मेचल-मल्काजगिरि और रंगारेड्डी जिलों में कुल लंबित नोटिसों का एक बड़ा हिस्सा (41.9%) केंद्रित है। केवल हैदराबाद में ही 93,677 मामले जिला निर्वाचन अधिकारी के पास लंबित हैं।
क्षेत्रीय वितरण और स्थिति
| जिला/क्षेत्र | नोटिस वितरण दर (%) | स्थिति |
|---|---|---|
| नागार्जुनकुर्नूल | 98.6% | सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन |
| हैदराबाद | 67.7% | मध्यम |
| रंगारेड्डी | 50.3% | चिंताजनक |
| मेचल-मल्काजगिरि | 26.2% | अत्यधिक लंबित |
| आदिलाबाद | 12.7% | सबसे कम |
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नोटिस केवल विसंगतियों के आधार पर जारी किए जा रहे हैं, चाहे वह व्यक्ति किसी भी पद पर हो। यहाँ तक कि कुछ IAS अधिकारियों को भी नोटिस मिले हैं। सुदर्शन रेड्डी ने बताया कि मतदाता सूची में बुनियादी विसंगतियों की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) तब किया जाता है जब डेटा में बड़े पैमाने पर विसंगतियां या त्रुटियां पाई जाती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि 'एक व्यक्ति, एक वोट' का सिद्धांत पूरी तरह से लागू हो।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मतदाता सूची में देरी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: लगभग 40 लाख नोटिसों का वितरण न हो पाना और सुनवाई की प्रक्रिया का धीमा होना मुख्य कारण है।
प्रश्न 2: क्या नोटिस मिलने का मतलब है कि मेरा नाम सूची से काट दिया जाएगा?
उत्तर: नहीं, नोटिस केवल विसंगतियों की जांच के लिए है। आपको आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे ताकि आपकी पात्रता सिद्ध हो सके।