पंजाब सरकार के 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में दाखिलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। 2025 में दाखिलों में 164% का उछाल आया है, जो समाज में जागरूकता बढ़ने का संकेत है।
- नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले 9,577 (2024) से बढ़कर 25,290 (2025) हो गए हैं।
- पुनर्वास केंद्रों में दाखिलों में 224% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
- NDPS अधिनियम की धारा 64A के तहत 11,000 से अधिक लोगों को कानूनी सुरक्षा मिली है।
पंजाब सरकार द्वारा संचालित 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत राज्य के नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में मरीजों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिलों की संख्या 9,577 से बढ़कर 25,290 हो गई है, जो कि 164 प्रतिशत की भारी वृद्धि को दर्शाता है।
यह वृद्धि केवल नशा मुक्ति केंद्रों तक सीमित नहीं है। पुनर्वास केंद्रों (Rehabilitation Centres) में भी मरीजों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। वर्ष 2024 में जहाँ 2,644 लोग पुनर्वास केंद्रों में भर्ती हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 8,574 हो गई है, जो 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, आउटपेशेंट ओपियोइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट (OAT) क्लीनिकों में भी नए पंजीकरणों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दाखिलों में यह वृद्धि केवल नशे की बढ़ती समस्या का संकेत नहीं है, बल्कि यह समाज में व्याप्त कलंक (stigma) को तोड़ने का भी प्रमाण है। अधिक से अधिक परिवार अब अपने सदस्यों के इलाज के लिए सरकारी तंत्र की ओर रुख कर रहे हैं।
बढ़ते दाखिले इस बात का प्रमाण हैं कि लोग अब नशे के जाल से बाहर निकलने के लिए औपचारिक उपचार प्रणाली पर भरोसा कर रहे हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का यह अभियान तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है: नशा तस्करों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन, प्रभावित लोगों के लिए उपचार और पुनर्वास, और बच्चों के लिए निवारक उपाय। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य परिवारों को फिर से एकजुट करना और संघर्ष कर रहे लोगों को सुधार का मार्ग दिखाना है।
कानूनी सुरक्षा और राहत
सरकार ने NDPS अधिनियम की धारा 64A का प्रभावी उपयोग किया है। इस प्रावधान के तहत, यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से नशा छोड़ने के लिए उपचार लेता है, तो उसे छोटी मात्रा में अपराध या सेवन के मामलों में कानूनी अभियोजन से सशर्त छूट दी जाती है। अगस्त 2026 तक, 11,000 से अधिक लोगों को इस धारा के तहत सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है।
ऐतिहासिक संदर्भ
पंजाब लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी और नशाखोरी की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत किया है, बल्कि स्वास्थ्य ढांचे को भी सुदृढ़ किया है ताकि नशे के शिकार लोगों को इलाज मिल सके।
Frequently Asked Questions
1. 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान क्या है?
यह पंजाब सरकार द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक अभियान है जिसका उद्देश्य नशा तस्करों पर नकेल कसना और नशे के शिकार लोगों को उपचार व पुनर्वास प्रदान करना है।
2. NDPS की धारा 64A क्या लाभ देती है?
यह धारा उन लोगों को कानूनी कार्रवाई से राहत देती है जो स्वेच्छा से नशा छोड़ने के लिए सरकारी केंद्रों में उपचार लेने का निर्णय लेते हैं।