मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बड़े बजट वाली दुर्गा पूजा समितियों से सरकारी वित्तीय सहायता न लेने की अपील की है और उत्सव के दौरान कई नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।

  • बड़े बजट वाली पूजा समितियां स्वेच्छा से सरकारी सहायता का त्याग करें।
  • केवल जरूरतमंद समितियों को ₹1 लाख की सहायता राशि दी जाएगी।
  • महालय से पहले किसी भी पूजा का उद्घाटन वर्जित होगा।
  • इस वर्ष सरकार द्वारा कोई दुर्गा पूजा कार्निवल आयोजित नहीं किया जाएगा।
  • अष्टमी के दिन राज्य के सभी शराब की दुकानें और बार बंद रहेंगे।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आगामी दुर्गा पूजा उत्सव के संबंध में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव की घोषणा की है। सोमवार को एक समीक्षा बैठक के दौरान, उन्होंने बड़े बजट वाली सामुदायिक दुर्गा पूजा समितियों से आग्रह किया कि वे राज्य सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता को स्वेच्छा से छोड़ दें। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य 'मुफ्त की रेवड़ी' बांटना नहीं, बल्कि केवल उन समितियों की मदद करना है जो वित्तीय रूप से सक्षम नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री की शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करना चाहता। मेरा अनुरोध है कि जो समितियां बिना सरकारी सहायता के पूजा आयोजित करने में सक्षम हैं, वे सहायता न लें। जो समितियां इस धन के बिना पूजा आयोजित नहीं कर सकतीं, उन्हें सरकार द्वारा ₹1 लाख की राशि दी जाएगी।" गौरतलब है कि पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार ने 2018 में इस सहायता को शुरू किया था, जो 2025 तक बढ़कर ₹1.10 लाख प्रति समिति हो गई थी।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम राज्य के खजाने पर पड़ने वाले ₹500 करोड़ के वार्षिक बोझ को कम करने और सरकारी धन के लक्षित वितरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। अधिकारी का यह रुख राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की 'डोल' (मुफ्त उपहार) नीति की आलोचना करते रहे हैं।

सरकारी सहायता को केवल कल्याणकारी उद्देश्य तक सीमित रखना चाहिए, न कि इसे एक चुनावी उपकरण बनाना चाहिए।

उत्सव के प्रबंधन को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़े नियमों की भी घोषणा की है। अब महालय (देवी पक्ष की शुरुआत) से पहले किसी भी दुर्गा पूजा का उद्घाटन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, इस वर्ष राज्य सरकार पारंपरिक 'दुर्गा पूजा कार्निवल' का आयोजन नहीं करेगी। हालांकि, महालय के अवसर पर ईडन गार्डन्स में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महाकुंभ है। पिछले कुछ वर्षों में, राज्य सरकार द्वारा पूजा समितियों को दी जाने वाली नकद राशि एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा रही है। जहाँ विपक्ष इसे सांस्कृतिक संरक्षण मानता है, वहीं सत्तापक्ष इसे राजकोषीय बोझ और चुनावी लाभ प्राप्त करने का जरिया बताता है।

प्रमुख प्रतिबंध और व्यवस्थाएं

मुख्यमंत्री ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • पूजा जुलूसों को राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध करने की अनुमति नहीं होगी।
  • मूर्ति विसर्जन के बाद घाटों से मूर्तियों को निकालने के लिए क्रेन का उपयोग किया जा सकेगा।
  • उत्सव के दौरान डीजे (DJ) बजाने पर प्रतिबंध रहेगा।
  • अष्टमी के दिन राज्य के सभी शराब के लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठान बंद रहेंगे।

हालांकि, उत्सव के दौरान बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कोलकाता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉर्पोरेशन के साथ समन्वय किया है, ताकि समितियों को पूजा के दौरान मुफ्त बिजली मिल सके।

क्या आप जानते हैं?: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को यूनेस्को (UNESCO) की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या सभी पूजा समितियों को ₹1 लाख मिलेंगे?
नहीं, केवल वे समितियां जो वित्तीय रूप से अक्षम हैं और जिन्होंने आवेदन किया है, उन्हें ही ₹1 लाख की सहायता मिलेगी।

2. क्या इस वर्ष दुर्गा पूजा कार्निवल होगा?
नहीं, मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि इस वर्ष सरकार द्वारा कोई कार्निवल आयोजित नहीं किया जाएगा।