हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची में भारी विसंगतियों और प्रशासनिक गलतियों का हवाला देते हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की समय सीमा को चार सप्ताह और बढ़ाने की मांग की है।

  • असददुद्दीन ओवैसी ने 9 नवंबर की वर्तमान समय सीमा के बाद अतिरिक्त चार सप्ताह के विस्तार की मांग की।
  • करवान निर्वाचन क्षेत्र में 1 लाख से अधिक नोटिस जारी होने के साथ भारी विसंगतियां सामने आईं।
  • मतदाताओं को गलत तरीके से 'मृत' या 'स्थानांतरित' चिह्नित करने पर गंभीर चिंता जताई गई।

हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी, जो ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष हैं, ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की समय सीमा को और बढ़ाने की आधिकारिक मांग की है। हालांकि वर्तमान समय सीमा को बढ़ाकर 9 नवंबर कर दिया गया है, लेकिन ओवैसी का तर्क है कि मतदाता सूची में पाई गई गलतियों के पैमाने को देखते हुए यह समय पर्याप्त नहीं है।

करवान विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में सुनवाई केंद्रों का दौरा करते हुए, सांसद ने प्रशासनिक अव्यवस्था का खुलासा किया। ओवैसी द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, अकेले इस निर्वाचन क्षेत्र में 59,470 विसंगतियां हैं, जबकि 40,750 मामले अभी भी अनमैप्ड (unmapped) हैं। इसके परिणामस्वरूप कुल 1,00,223 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे नागरिकों और प्रशासन दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ये विसंगतियां केवल लिपिकीय त्रुटियां नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मताधिकार के संकट का संकेत हैं। यदि हजारों पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से 'मृत' या 'स्थानांतरित' चिह्नित किया जाता है, तो यह अगले चुनाव चक्र के दौरान व्यापक मतदाता दमन का कारण बन सकता है। मतदाता सूची की सटीकता निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है, और वर्तमान त्रुटियां डेटा सत्यापन प्रक्रिया में प्रणालीगत विफलता का सुझाव देती हैं।

"लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता पूरी तरह से मतदाता सूची की सटीकता पर निर्भर करती है; यहाँ कोई भी प्रणालीगत त्रुटि वोट देने के अधिकार के लिए सीधा खतरा है।"

ओवैसी ने विशेष रूप से रिकॉर्ड की विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि कई व्यक्ति जिन्हें 'स्थानांतरित' (shifted) दिखाया गया है, वे अभी भी अपने मूल पते पर ही रह रहे हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक वे मामले हैं जहाँ जीवित नागरिकों को मृत घोषित कर दिया गया है, जिससे आधिकारिक रिकॉर्ड से उनका राजनीतिक अस्तित्व मिट गया है।

ऐतिहासिक रूप से, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन का संचालन मतदाता सूची से डुप्लिकेट और मृत मतदाताओं को हटाने के लिए किया जाता है ताकि एक स्वच्छ सूची सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, जब यह प्रक्रिया अत्यधिक आक्रामक या खराब तरीके से प्रबंधित होती है, तो यह अक्सर उन हाशिए के समुदायों को प्रभावित करती है जिनके पास समय पर इन नोटिसों को चुनौती देने के लिए पर्याप्त दस्तावेज या साधन नहीं होते हैं।

क्या आप जानते हैं?: स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा अपनाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मतदाता सूची निर्वाचन क्षेत्र की वास्तविक जीवित जनसंख्या को दर्शाती है।

करवान निर्वाचन क्षेत्र डेटा विवरण

श्रेणीमामलों की संख्या
कुल जारी नोटिस1,00,223
कुल विसंगतियां59,470
अनमैप्ड मामले40,750

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: असदुद्दीन ओवैसी समय सीमा बढ़ाने की मांग क्यों कर रहे हैं?
उनका मानना है कि 9 नवंबर की वर्तमान समय सीमा उन हजारों लोगों के लिए अपर्याप्त है जिन्हें नोटिस मिले हैं और जिन्हें अपनी स्थिति सुधारने की आवश्यकता है।

प्रश्न 2: मतदाता सूची में किस तरह की गलतियां पाई गई हैं?
ऐसे मतदाता जो अभी जीवित हैं उन्हें मृत चिह्नित किया गया है, और जो अपने पंजीकृत पते पर रह रहे हैं उन्हें 'स्थानांतरित' दिखा दिया गया है।