कर्नाटक राज्य रैत संघ (KRRS) ने राज्य में जारी भीषण सूखे के बीच सरकार और विपक्ष की निष्क्रियता की कड़ी आलोचना की है। संस्था ने तत्काल राहत कार्यक्रम लागू करने और किसानों के कर्ज माफ करने की मांग की है।

  • KRRS ने सरकार और विपक्ष पर 'नाटकीयता' का आरोप लगाया।
  • किसानों के लिए तत्काल सूखा राहत कार्यक्रम और कर्ज माफी की मांग।
  • कावेरी जल विवाद पर राज्य के हितों की रक्षा करने का आग्रह।
  • अगले सप्ताह राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी।

कर्नाटक में गहराते सूखे के संकट के बीच, कर्नाटक राज्य रैत संघ (KRRS) ने राज्य सरकार और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। मैसूर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, KRRS प्रमुख बडगलपुरा नगेंद्र ने आरोप लगाया कि जहाँ एक ओर किसान संकट में हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार केवल 'आंखों में धूल झोंकने' का काम कर रही है और विपक्ष सड़कों पर केवल 'नाटक' कर रहा है।

नगेंद्र ने कहा कि कर्नाटक एक अभूतपूर्व सूखे का सामना कर रहा है, लेकिन केंद्र और राज्य दोनों ही इस स्थिति से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर उपाय करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें तकनीकी पहलुओं और अध्ययनों का हवाला देकर समय बर्बाद कर रही हैं, जबकि वास्तव में उनमें किसानों के प्रति मानवीय संवेदना और इच्छाशक्ति की कमी है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कृषि प्रधान राज्य में सूखे की स्थिति न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक संकट भी पैदा करती है। यदि समय रहते राहत नहीं दी गई, तो किसान आत्महत्याओं की ओर बढ़ सकते हैं और पशुधन की भारी हानि हो सकती है।

'इन सरकारों में सूखा राहत प्रदान करने के लिए न तो इच्छाशक्ति है और न ही मानवता।' - बडगलपुरा नगेंद्र

KRRS ने मांग की है कि राज्य सरकार को NDRF और SDRF के मानदंडों का इंतजार किए बिना अपने स्वयं के संसाधनों का उपयोग करके तुरंत राहत प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने बैंकों को निर्देश देने की भी मांग की ताकि सूखे की स्थिति में किसानों से ऋण वसूली की प्रक्रिया को रोका जा सके। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच फसल ऋण माफी के लिए 50:50 के अनुपात में जिम्मेदारी साझा करने का प्रस्ताव दिया है।

एक अन्य संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए, नगेंद्र ने कावेरी जल को तमिलनाडु को जारी करने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने इसे राज्य के लोगों के साथ विश्वासघात बताया और सरकार से इस मामले में एक 'राजनीतिक निर्णय' लेने का आग्रह किया ताकि राज्य के हितों की रक्षा की जा सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक ऐतिहासिक रूप से जल संकट और सूखे की मार झेलता रहा है। कावेरी नदी विवाद दशकों पुराना है, जो अक्सर सूखे के दौरान राजनीतिक और सामाजिक तनाव का केंद्र बन जाता है।

Did You Know?: भारत में सूखे के दौरान कृषि क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकता है।

Frequently Asked Questions

1. KRRS ने सरकार से क्या मुख्य मांग की है?
KRRS ने तत्काल सूखा राहत कार्यक्रम, किसानों के ऋणों की माफी और बैंकों द्वारा ऋण वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।

2. KRRS के अगले कदम क्या हैं?
KRRS ने केंद्र और राज्य की लापरवाही के खिलाफ अगले सप्ताह राज्यव्यापी बड़े आंदोलन की योजना बनाई है।