मद्रास उच्च न्यायालय ने पेरुंदुरई विधानसभा क्षेत्र के लिए DMK उम्मीदवार थोपू वेंकटचलम द्वारा दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पूर्व AIADMK विधायक और अब TVK नेता एस. जयकुमार की जीत को बरकरार रखा है।

  • मद्रास उच्च न्यायालय ने पेरुंदुरई निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को चुनौती देने वाली DMK की याचिका खारिज कर दी।
  • न्यायाधीश डी. भरत चक्रवर्ती ने एस. जयकुमार के पक्ष में निर्णय सुनाया।
  • इस फैसले का असर तमिलनाडु में होने वाले उपचुनावों की घोषणा पर पड़ सकता है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पेरुंदुरई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए DMK उम्मीदवार थोपू वेंकटचलम (उर्फ एन.डी. वेंकटचलम) द्वारा दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका एस. जयकुमार की चुनावी जीत को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी, जिन्होंने पहले AIADMK से चुनाव लड़ा था और बाद में इस्तीफा देने के बाद सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो गए थे।

कानूनी लड़ाई और चुनावी परिणाम

न्यायाधीश डी. भरत चक्रवर्ती ने एस. जयकुमार द्वारा दायर एक आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिससे चुनाव याचिका को खारिज करने का आदेश दिया गया। जयकुमार ने इस सीट पर 9,693 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने कुल 70,302 वोट प्राप्त किए, जबकि याचिकाकर्ता वेंकटचलम को 60,609 वोट मिले थे। उल्लेखनीय है कि जयकुमार ने 25 मई, 2026 को विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया था और फिर TVK का हिस्सा बने थे।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध तमिलनाडु में आगामी उपचुनावों से है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के आलोक में तमिलनाडु के सात खाली विधानसभा क्षेत्रों में से पांच (पेरुंदुरई सहित) में उपचुनाव आयोजित न करने का निर्णय लिया था। आयोग का रुख यह था कि जब तक इन निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित चुनाव याचिकाओं का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक उपचुनावों की घोषणा नहीं की जाएगी।

कानूनी जटिलताओं और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के कारण, चुनावी याचिकाओं का निपटारा होने तक उपचुनावों का रुकना एक मानक प्रक्रिया बन गई है।

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि 'चुनाव आयोग उन पांच निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनावों की घोषणा करने का प्रस्ताव नहीं करता है जहाँ निर्वाचित उम्मीदवारों की जीत को चुनौती देने वाली याचिकाएं लंबित हैं।' इसमें तिरुचि ईस्ट, पेरुंदुरई, अंबसामुद्रम, विरलीमलई और करूर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और कानूनी आधार

इस मामले में कानूनी आधार सुप्रीम कोर्ट के 2010 के ऐतिहासिक फैसले, 'चुनाव आयोग बनाम तेलंगाना राष्ट्र समिति' में निहित है। इस फैसले के अनुसार, यदि किसी चुनाव याचिकाकर्ता ने मौजूदा विधायक/सांसद की जीत को शून्य घोषित करने के बाद खुद को निर्वाचित घोषित करने की मांग की है, तो उस क्षेत्र में उपचुनाव नहीं कराए जाने चाहिए।

Did You Know?: तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में उपचुनावों का इंतजार केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक ही है, ताकि दोहरी चुनावी प्रक्रिया से बचा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: एस. जयकुमार वर्तमान में किस पार्टी के सदस्य हैं?
उत्तर: एस. जयकुमार पहले AIADMK से थे, लेकिन अब वे सत्तारूढ़ TVK पार्टी के सदस्य हैं।

प्रश्न 2: क्या इस फैसले के बाद पेरुंदुरई में तुरंत उपचुनाव होंगे?
उत्तर: नहीं, चूंकि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में अपील के अधीन है, इसलिए चुनाव आयोग अंतिम निर्णय लेने से पहले अपील के परिणाम का इंतजार कर सकता है।