प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर छापेमारी के दौरान अपने अधिकारियों पर हमला करने वाले 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसमें सीपीआई(एम) और एसएफआई के कार्यकर्ता शामिल हैं।
- ईडी ने छापेमारी के दौरान हमला करने वाले 27 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
- आरोपियों में सीपीआई(एम) और एसएफआई (SFI) के कार्यकर्ता शामिल हैं।
- यह मामला एक्सालोजिक-कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) पे-ऑफ घोटाले से जुड़ा है।
- पीएमएलए (PMLA) के तहत गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
कोच्चि: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक कड़ा कदम उठाते हुए उन सभी 27 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिन्होंने मई 2026 में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन के आवास पर छापेमारी के दौरान केंद्रीय अधिकारियों पर हमला किया था। इस मामले में सीपीआई(एम) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ताओं को नामजद किया गया है।
घटना 27 मई, 2026 की है, जब ईडी की टीम तिरुवनंतपुरम में श्री विजयन के उस किराए के घर पर पहुंची थी, जहां उनकी बेटी टी. वीणा रहती थीं। टी. वीणा इस पूरे घोटाले में एक मुख्य आरोपी हैं। छापेमारी समाप्त कर लौटते समय, अधिकारियों की गाड़ी को भीड़ द्वारा घेर लिया गया और हिंसक हमला किया गया, जिससे एजेंसी के निजी वाहन को भारी नुकसान पहुँचा।
स्थानीय म्यूजियम पुलिस ने पहले ही इस घटना पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी, जिसमें हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, सार्वजनिक संपत्ति के विनाश और सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराएं शामिल थीं। अब ईडी ने इन सभी आरोपों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अनुसूचित अपराधों के रूप में शामिल कर लिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केंद्र और केरल राज्य सरकार के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है। जब एक जांच एजेंसी के अधिकारियों पर हमला होता है, तो यह कानून व्यवस्था की विफलता और राजनीतिक संरक्षण के प्रभाव को दर्शाता है। PMLA के तहत मामला दर्ज होने का मतलब है कि अब आरोपियों के लिए जमानत मिलना और कानूनी प्रक्रिया से बचना बहुत कठिन हो जाएगा।
केंद्र की जांच एजेंसियों और क्षेत्रीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच यह टकराव भविष्य में संघीय ढांचे में कानूनी संघर्षों को और तेज कर सकता है।
मामले में कानूनी मोड़ तब आया जब राज्य सरकार ने टी. गीना कुमारी को अभियोजक के पद से हटा दिया, क्योंकि उन्होंने नौवें आरोपी हरीश कुमार की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया था। उनकी जगह ए. संतोष कुमार को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है।
आरोपियों की स्थिति पर नजर डालें तो 27 में से अधिकांश फरार थे। इनमें से आदर्श बी.एस., जो एक एसएफआई कार्यकर्ता है, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भाग गया था, जिसे 10 अगस्त, 2026 को चेन्नई हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया। केवल एक आरोपी संतोष अभी भी फरार है, जिसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।
इस घटना के समानांतर, ईडी ने राज्य पुलिस महानिदेशक को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें पिनाराई विजयन, पूर्व लोक निर्माण मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास और उनकी पत्नी वीणा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। रिपोर्ट में आरोप है कि श्री विजयन ने अपनी बेटी के माध्यम से 3.28 करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी।
Frequently Asked Questions
1. यह पूरा विवाद किस घोटाले से जुड़ा है?
यह मामला एक्सालोजिक-कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) पे-ऑफ घोटाले से संबंधित है, जिसमें रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
2. ईडी ने PMLA का उपयोग क्यों किया?
क्योंकि पुलिस प्राथमिकी में दर्ज अपराध (जैसे आपराधिक साजिश) PMLA के तहत अनुसूचित अपराधों की श्रेणी में आते हैं, जिससे ईडी को अधिक शक्तियां मिल जाती हैं।