नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने CPCB की रिपोर्ट के आधार पर कोयंबटूर नगर निगम की कचरा प्रबंधन प्रणाली को पूरी तरह विफल पाया है। रिपोर्ट में भूजल प्रदूषण और प्रसंस्करण केंद्रों की भारी अक्षमता का खुलासा हुआ है।

  • कोयंबटूर प्रतिदिन 1,293 टन ठोस कचरा पैदा करता है, लेकिन प्रसंस्करण क्षमता अपर्याप्त है।
  • शहर के 17 बोरवेल का पानी पीने के लिए अनुपयुक्त पाया गया है।
  • 36 माइक्रो कंपोस्टिंग केंद्रों में से केवल 10 ही कार्यात्मक हैं।
  • वेलालोर डंपयार्ड में 89 लाख टन लीगेसी कचरा अभी भी बायो-माइनिंग के लिए लंबित है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दक्षिणी क्षेत्र ने कोयंबटूर नगर निगम द्वारा संचालित संपूर्ण अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को 'अपर्याप्त और त्रुटिपूर्ण' करार दिया है। यह सख्त टिप्पणी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) द्वारा किए गए एक संयुक्त निरीक्षण के बाद आई है। यह मामला मुख्य रूप से अप्रैल 2024 में वेलालोर डंपयार्ड में लगी भीषण आग और स्थानीय नागरिकों द्वारा दायर याचिकाओं के बाद सामने आया है।

CPCB की तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, कोयंबटूर शहर प्रतिदिन लगभग 1,293 टन ठोस कचरा उत्पन्न करता है। हालांकि नगर निगम का दावा है कि 91% से 95% कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण (segregation) किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। शहर की कुल प्रसंस्करण क्षमता 1,164 टन प्रतिदिन है, लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि अधिकांश सुविधाएं अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रही हैं।

प्रसंस्करण सुविधाओं की बदहाली

निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि शहर के 36 माइक्रो कंपोस्टिंग केंद्रों में से केवल 10 ही चालू हालत में थे। इन केंद्रों की परिचालन क्षमता उनकी निर्धारित क्षमता से काफी कम है, और कंपोस्ट रिकवरी की दक्षता मात्र 14.7% रही। इसी तरह, विंडरो कंपोस्टिंग प्लांट में भी CPCB के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवश्यक क्षेत्र में 73% की कमी पाई गई, जिससे इसकी दक्षता 12% से भी नीचे गिर गई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि एक गंभीर पर्यावरणीय आपातकाल है। जब एक औद्योगिक शहर अपनी कचरा प्रसंस्करण क्षमता को बनाए रखने में विफल रहता है, तो इसका सीधा असर सार्वजनिक स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। लीचेट (leachate) का रिसाव और डंपयार्ड में आग लगना इस बात का प्रमाण है कि शहर का बुनियादी ढांचा वर्तमान कचरा उत्पादन के बोझ को सहने में असमर्थ है।

"नगर निगमों द्वारा कागजों पर पृथक्करण का दावा करना और धरातल पर प्रसंस्करण केंद्रों का बंद होना, शहरी शासन की एक गहरी विफलता को दर्शाता है।"

पर्यावरणीय प्रभाव और भी भयावह हैं। वेलालोर साइट के आसपास के 17 बोरवेल के नमूनों की जांच में पाया गया कि TDS, क्लोराइड, BOD, कॉपर और निकेल का स्तर स्वीकार्य मानकों से कहीं अधिक है। इसका अर्थ है कि डंपयार्ड से निकलने वाले जहरीले रसायन भूजल में मिल चुके हैं, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है।

पैरामीटर दावा/क्षमता वास्तविक स्थिति
दैनिक कचरा उत्पादन 1,293 टन प्रसंस्करण क्षमता कम
माइक्रो कंपोस्टिंग केंद्र 36 केंद्र केवल 10 कार्यात्मक
प्रसंस्करण दक्षता उच्च दावा 12% - 14.7%
भूजल गुणवत्ता सुरक्षित (मानक) 17/17 बोरवेल अनुपयुक्त

NGT ने अब निगम आयुक्त को CPCB के प्रत्येक निष्कर्ष की जांच करने और एक समयबद्ध कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही, 23 अगस्त को डंपयार्ड में लगी आग के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित है।

क्या आप जानते हैं?: बायो-माइनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पुराने कचरे के ढेरों (Legacy Waste) को जैविक रूप से उपचारित करके मिट्टी, प्लास्टिक और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों में अलग किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. वेलालोर डंपयार्ड की वर्तमान स्थिति क्या है?
वेलालोर साइट पर लगभग 89 लाख टन पुराना कचरा जमा है, जिसे अभी तक पूरी तरह से बायो-माइन नहीं किया गया है, और यहाँ भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है।

2. NGT ने नगर निगम को क्या निर्देश दिए हैं?
NGT ने आयुक्त को CPCB की रिपोर्ट पर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने और भविष्य में डंपयार्ड की आग जैसी घटनाओं को रोकने के उपाय बताने का आदेश दिया है।