मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दावा किया है कि 12 राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ कोई अपील नहीं की गई है, साथ ही उन्होंने EVM की सुरक्षा पर जोर दिया।
- CEC ज्ञानेश कुमार का दावा है कि SIR पूरा होने वाले 12 राज्यों में नाम हटाने के खिलाफ शून्य अपील आई हैं।
- CEC ने कहा कि EVM 'साधारण कैलकुलेटर' की तरह हैं और इंटरनेट से न जुड़े होने के कारण हैक नहीं किए जा सकते।
- पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भारत ने मोबाइल वोटिंग के विकल्प को खारिज कर दिया है।
- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया अब सरकार द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री सहित एक समिति के माध्यम से होती है।
अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (AMA) में एक कार्यक्रम के दौरान, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर एक हैरान करने वाला दावा किया। कुमार ने कहा कि जिन 12 राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां जिला कलेक्टरों के पास नाम हटाए जाने के खिलाफ एक भी अपील दर्ज नहीं की गई है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की सटीकता पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। जब उनसे SIR प्रक्रिया से उत्पन्न हजारों शिकायतों के बारे में पूछा गया, तो कुमार ने अपील की त्रि-स्तरीय प्रणाली को समझाया: पहले कलेक्टर, फिर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और अंत में अदालत। उन्होंने गुजरात के CEO संदीप सगले से भी पुष्टि की, जिन्होंने कहा कि राज्य में अब तक शून्य अपीलें प्राप्त हुई हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि CEC के दावों और जमीनी रिपोर्टों के बीच एक बड़ा विरोधाभास है। जहाँ CEC 12 राज्यों में 'शून्य' अपील की बात कर रहे हैं, वहीं पिछली रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरणों ने 82,000 से अधिक अपीलों का निपटारा किया, जिनमें से 91% नाम वापस जोड़े गए। यह विसंगति SIR प्रक्रिया की एकरूपता और मतदाताओं की जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मतदाता सूची के अलावा, CEC ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की पवित्रता पर जोर दिया। उन्हें "साधारण कैलकुलेटर" बताते हुए उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि वे इंटरनेट से नहीं जुड़े हैं, इसलिए उन्हें हैक नहीं किया जा सकता। उन्होंने उल्लेख किया कि EVM सुप्रीम कोर्ट में 41 चुनौतियों का सामना कर चुके हैं और पूरी तरह सुरक्षित हैं।
पारदर्शी लोकतंत्र मोबाइल वोटिंग के बारे में नहीं सोचते क्योंकि निजी कंपनियों के सर्वर पर आधारित क्लाउड सिस्टम मतपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा से समझौता करता है।
चर्चा के दौरान चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी बात हुई। CEC ने उस कानून का बचाव किया जिसने चयन पैनल में मुख्य न्यायाधीश (CJI) की जगह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को रखा है। उनका तर्क था कि सीधी सरकारी सिफारिश के बजाय समिति आधारित प्रणाली अधिक बेहतर है, हालांकि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) जैसे संगठनों ने इसे कार्यपालिका का प्रभुत्व बढ़ाने वाला कदम बताया है।
ऐतिहासिक रूप से, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत नियुक्तियां सरकारी सिफारिशों पर आधारित थीं। 2023 के नए अधिनियम ने एक समिति का गठन किया जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। इस बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दायर की गई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या EVM को इंटरनेट के जरिए हैक किया जा सकता है?
नहीं, CEC के अनुसार, EVM स्टैंडअलोन मशीनें हैं और इंटरनेट से नहीं जुड़ी हैं, इसलिए रिमोट हैकिंग असंभव है।
प्रश्न 2: मतदाता सूची से नाम हटने पर अपील कैसे करें?
मतदाता पहले जिला कलेक्टर को, फिर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को अपील कर सकते हैं, और अंत में अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।