खनिज और खनन भूमि पर कर लगाने के अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार और ओडिशा के बीच तनाव बढ़ गया है। MMDR संशोधन अधिनियम 2026 ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को पलटते हुए राज्यों की शक्तियों को सीमित कर दिया है।

  • MMDR संशोधन अधिनियम 2026 ने खनन भूमि पर राज्यों के कर लगाने के अधिकार को सीमित कर दिया है।
  • बीजेडी का दावा है कि इससे ओडिशा को सालाना 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
  • यह कानून 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के विपरीत है जिसने राज्यों को विशेष कर अधिकार दिए थे।

ओडिशा की राजनीति और अर्थव्यवस्था गहरे रूप से खनन क्षेत्र से जुड़ी हुई है। हाल ही में पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 ने राज्य में एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस कानून को ओडिशा के लिए 'काला दिन' करार देते हुए केंद्र सरकार पर संघीय ढांचे पर हमला करने का आरोप लगाया है।

विवाद की मुख्य जड़ यह है कि यह नया कानून एक समान राष्ट्रीय कर ढांचा स्थापित करता है, जो प्रभावी रूप से राज्यों की उस शक्ति को कम करता है जिसके माध्यम से वे अपनी खनिज समृद्ध भूमि पर कर लगा सकते थे। यह कदम 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्णय के बाद आया है, जिसमें 9 न्यायाधीशों की बेंच ने स्पष्ट किया था कि राज्यों के पास खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का विशेष अधिकार है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल वित्तीय नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत के 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) की परीक्षा है। जब केंद्र सरकार विधायी शक्तियों का उपयोग करके न्यायिक निर्णयों के प्रभाव को कम करती है, तो यह भविष्य के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है। ओडिशा जैसे राज्य, जो देश के खनिज भंडार का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करते हैं, अपनी वित्तीय स्वायत्तता खोने के डर में हैं।

"राज्यों से उनके वित्तीय अधिकार छीनना सीधे तौर पर देश के संघीय ढांचे पर प्रहार है, जिससे राज्यों की विकास क्षमता प्रभावित होगी।"

दूसरी ओर, राज्य के स्टील और खान मंत्री बिभूति जेना ने इन चिंताओं को खारिज किया है। उनका तर्क है कि 2015 के संशोधनों के बाद ओडिशा की कमाई 5,000 करोड़ से बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये हो गई है। सरकार का कहना है कि बहु-स्तरीय करों से औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचता, जिसे रोकने के लिए यह एकरूपता आवश्यक थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: MMDR अधिनियम 1957 भारत में खनन का मुख्य कानून है। 2015 में, खनिज रियायतों के आवंटन को प्रतिस्पर्धी नीलामी में बदल दिया गया था, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) का गठन हुआ। हालांकि, 2024 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला राज्यों के पक्ष में गया था, जिसने उन्हें 2005 से बकाया कर वसूलने की अनुमति दी थी।

पक्षतर्क/दावासंभावित प्रभाव
बीजेडी/विपक्षसंघवाद पर हमला₹1 लाख करोड़ का बकाया नुकसान
केंद्र/बीजेपीऔद्योगिक एकरूपताव्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business)
strong{क्या आप जानते हैं?:} ओडिशा भारत के कुल लौह अयस्क और क्रोमाइट भंडार का एक बहुत बड़ा हिस्सा रखता है, जिससे यह वैश्विक खनन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: MMDR संशोधन अधिनियम 2026 क्या है?
यह एक कानून है जो प्रमुख खनिजों के लिए एक समान राष्ट्रीय कर ढांचा लागू करता है और खनन भूमि पर राज्यों के कर लगाने की शक्ति को सीमित करता है।

प्रश्न 2: ओडिशा सरकार को कितना वित्तीय नुकसान होने का अनुमान है?
बीजेडी के अनुसार, राज्य को सालाना 12,000 करोड़ रुपये और लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के बकाया राजस्व का नुकसान हो सकता है।