6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी गुटों के बीच पार्टी चिन्ह 'घास और दो फूल' को लेकर कानूनी जंग छिड़ गई है।
- नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होंगे।
- टीएमसी ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में दो गुटों में विभाजित है।
- भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को अब तय करना है कि आधिकारिक पार्टी चिन्ह किसके पास रहेगा।
- ममता बनर्जी राज्य विधानसभा में अपनी वापसी के लिए चुनाव लड़ सकती हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक सरजमीं एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पहचान की लड़ाई बन गए हैं। पार्टी की सुप्रीमो ममता बनर्जी और विद्रोही नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दो गुटों ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, जिससे 'घास और दो फूल' के चुनाव चिन्ह पर विवाद गहरा गया है।
यह संकट 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर हुए बड़े विद्रोह का परिणाम है। टीएमसी के 80 निर्वाचित विधायकों में से 65 से अधिक ने ममता बनर्जी से नाता तोड़ लिया है। विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक अखरुज्जमान ने स्पष्ट किया है कि नामांकन के समय वे पार्टी चिन्ह का दावा करेंगे, और यदि चुनाव आयोग ने समय सीमा तक चिन्ह आवंटित नहीं किया, तो उनके उम्मीदवार निर्दलीय लड़ेंगे।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह केवल एक स्थानीय विवाद नहीं है, बल्कि टीएमसी के अस्तित्व की लड़ाई है। यदि चुनाव आयोग चिन्ह विद्रोही गुट को सौंपता है, तो यह ममता बनर्जी के नेतृत्व और वैधता के लिए एक विनाशकारी झटका होगा। इसके विपरीत, यदि वफादार गुट जीतता है, तो सत्ता तो बनी रहेगी लेकिन विधानसभा में उनकी संख्यात्मक शक्ति बेहद कम होगी।
पार्टी चिन्ह पर चुनाव आयोग का निर्णय इस बात का लिटमस टेस्ट होगा कि बड़े पैमाने पर दलबदल के मामलों में पार्टी निष्ठा और विधायी बहुमत में से किसे प्राथमिकता दी जाती है।
नंदीग्राम की स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, जहाँ ममता बनर्जी 2021 में बहुत कम अंतर से हारी थीं। ऐसी अटकलें हैं कि वह इस सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक वापसी कर सकती हैं। वहीं, मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट, जहाँ मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता है, उनके लिए एक सुरक्षित रास्ता हो सकती है यदि विपक्षी दल एकजुट होकर उनका समर्थन करें।
ये उपचुनाव सुवेंदु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम सीट छोड़ने और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के हुमायूं कबीर द्वारा रेजीनगर सीट छोड़ने के कारण आवश्यक हो गए हैं। AJUP ने पहले ही अपनी तैयारी पूरी कर ली है और गोलम नबी आजाद ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
| सीट | पिछला विजेता | पार्टी | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|
| नंदीग्राम | सुवेंदु अधिकारी | बीजेपी | 9,665 वोट |
| रेजीनगर | हुमायूं कबीर | AJUP | 58,876 वोट |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
टीएमसी चिन्ह के लिए कौन से दो गुट लड़ रहे हैं?
दो मुख्य गुट पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और विद्रोही नेता रितब्रत बनर्जी (पूर्व विधायकों के बहुमत के साथ) के नेतृत्व में हैं।
इन उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि क्या है?
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर है।