मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल के शुरुआती पांच महीनों में विपक्ष के कड़े विरोध और जनता के दबाव के कारण सरकार को अपने छह महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को बदलना या वापस लेना पड़ा है।
- शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) को दो चरणों के बजाय एक ही चरण में आयोजित करने का निर्णय।
- सैटेलाइट टाउनशिप के लिए भूमि खरीद-बिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाया गया।
- छात्र क्रेडिट कार्ड योजना की सीमा को ₹2 लाख से बढ़ाकर पुनः ₹4 लाख किया गया।
- निजी वाहनों के लिए स्टेट हाईवे और पुलों पर टोल टैक्स लगाने का फैसला वापस लिया।
बिहार की राजनीति में पिछले पांच महीने काफी उथल-पुथल भरे रहे हैं। 15 अप्रैल, 2026 को नीतीश कुमार का स्थान लेने के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। हालांकि, अपने 100 दिनों के कार्यकाल को 'ऐतिहासिक' बताने वाले मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत और राजनीतिक दबाव के कारण कई मोर्चों पर पीछे हटना पड़ा है।
सबसे हालिया मामला शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) का है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अगस्त 2026 में इसे प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के दो चरणों में आयोजित करने की घोषणा की थी। लेकिन छात्रों के व्यापक विरोध और विपक्षी दलों के हंगामे के बाद, सरकार को झुकना पड़ा और परीक्षा को एक ही चरण में कराने की सहमति देनी पड़ी। इसे छात्र समुदाय की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
भूमि सुधार और शहरी विकास के मोर्चे पर भी सरकार को झटका लगा। कैबिनेट ने 11 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया था, जिसके तहत मास्टर प्लान बनने तक भूमि की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और स्थानीय भूस्वामियों ने इसे कृषि भूमि और आजीविका के लिए खतरा बताया। भारी विरोध के बाद 12 अगस्त को कैबिनेट ने इन प्रतिबंधों को हटा लिया, हालांकि किसान अभी भी पूरी योजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह 'U-टर्न' की प्रवृत्ति सरकार की जल्दबाजी और नीतिगत योजना में कमी को दर्शाती है। जब कोई सरकार बिना व्यापक परामर्श के बड़े फैसले लेती है, तो उसे जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति दर्शाती है कि बिहार में अब केवल सत्ता का प्रभाव नहीं, बल्कि जन-दबाव और विपक्ष की सक्रियता भी नीति निर्धारण में बड़ी भूमिका निभा रही है।
इसके अलावा, सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के और अर्ध-पक्के मकानों पर होल्डिंग टैक्स लगाने के फैसले से भी किनारा कर लिया। आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे गरीबों पर अतिरिक्त बोझ बताया था। साथ ही, छात्र क्रेडिट कार्ड की राशि को ₹4 लाख से घटाकर ₹2 लाख करने के फैसले को भी भारी विरोध के बाद वापस लिया गया।
"सरकार बहुत तेजी से काम करना चाहती है और अपने पूर्ववर्ती से बड़ी लकीर खींचने की कोशिश कर रही है, लेकिन जल्दबाजी में लिए गए फैसले अक्सर प्रतिकूल परिणाम देते हैं।" - डॉ. संजय कुमार, राजनीतिक विशेषज्ञ।
सड़कों पर टोल टैक्स का मुद्दा भी काफी गरमाया रहा। सरकार ने सभी श्रेणियों के वाहनों से यूजर फीस लेने का नियम बनाया था, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही इसे बदल दिया गया। अब केवल वाणिज्यिक वाहनों से ही शुल्क लिया जाएगा, जबकि निजी वाहनों को इससे मुक्त रखा गया है।
| निर्णय (Decision) | प्रारंभिक प्रस्ताव (Initial Proposal) | संशोधित स्थिति (Revised Status) |
|---|---|---|
| TRE-4 परीक्षा | दो चरण (PT + Mains) | एकल चरण (Single Phase) |
| क्रेडिट कार्ड सीमा | ₹2 लाख | ₹4 लाख |
| निजी वाहन टोल | टोल लागू | टोल मुक्त |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किन मुख्य क्षेत्रों में अपने फैसले बदले?
उत्तर: उन्होंने मुख्य रूप से शिक्षा (भर्ती परीक्षा), कृषि/भूमि (सैटेलाइट टाउनशिप), वित्त (क्रेडिट कार्ड और टैक्स) और बुनियादी ढांचे (टोल टैक्स) से संबंधित फैसलों को बदला।
प्रश्न 2: इन फैसलों को वापस लेने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: विपक्षी दलों (विशेषकर आरजेडी) का कड़ा विरोध, छात्र संगठनों के प्रदर्शन और किसान संगठनों (SKM) का दबाव मुख्य कारण थे।