नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के शक्तिशाली नेताओं के साथ रणनीतिक बैठकें करेंगे, जिसमें रक्षा, ऊर्जा और वैश्विक शांति मुख्य मुद्दे होंगे।

  • पीएम मोदी राष्ट्रपति पुतिन, पेज़ेशकियन और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
  • रूस के साथ रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक साझेदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ईरान के साथ रणनीतिक चर्चा होगी।
  • भारत 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का नेतृत्व करेगा।

भारत की राजधानी दिल्ली इस समय वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गई है। आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक श्रृंखला के रूप में उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकों की मेजबानी करने जा रहे हैं। यह आयोजन न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक साख को दर्शाता है, बल्कि एक बदलती दुनिया में भारत की मध्यस्थ भूमिका को भी रेखांकित करता है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं। बिश्केक में हुई पिछली मुलाकात के बाद, अब दिल्ली में होने वाली चर्चाओं का मुख्य केंद्र रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों का विस्तार होगा। रूस और भारत के बीच समय-समय पर गहरे सैन्य संबंध रहे हैं, और इस बैठक से नए रक्षा सौदों की उम्मीद है।

वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम है। भारत-चीन संबंधों में मौजूदा तनाव और सीमा विवाद के बीच, दोनों नेताओं की मुलाकात वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तथा बाब अल-मंडब (Bab el-Mandeb) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों पर खतरों के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियन की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए ईरान के साथ समन्वय करना चाहता है।

"भारत का यह राजनयिक प्रयास उसे केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक सेतु (Global Bridge) के रूप में स्थापित कर रहा है जो परस्पर विरोधी शक्तियों के बीच संवाद स्थापित कर सकता है।"

प्रधानमंत्री मोदी केवल राष्ट्राध्यक्षों से ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ भी महत्वपूर्ण चर्चा करेंगे। ये बैठकें जलवायु परिवर्तन, वैश्विक शासन में सुधार और विकासशील देशों के अधिकारों पर केंद्रित होंगी।

ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स समूह ने पश्चिमी प्रभुत्व वाले आर्थिक ढांचे के विकल्प के रूप में अपनी पहचान बनाई है। भारत इस मंच का उपयोग 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की चिंताओं को उठाने और एक अधिक न्यायसंगत, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) के निर्माण के लिए कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स (BRICS) मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह था, लेकिन अब इसका विस्तार कई नए देशों तक हो चुका है, जिससे इसकी वैश्विक आर्थिक शक्ति और बढ़ गई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: भारत का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और वैश्विक शांति व स्थिरता को बढ़ावा देना है।

प्रश्न 2: ईरान के राष्ट्रपति की यात्रा का महत्व क्या है?
उत्तर: पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरों के बीच, भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए ईरान के साथ चर्चा कर रहा है।