प्रीती चिदंबरम ने हालिया BRICS शिखर सम्मेलन में भारत को मिलने वाले लाभों पर सवाल उठाए। शशि थरूर ने तुरंत जवाब देते हुए कुछ प्रमुख फायदों की सूची दी, जिससे राजनीतिक तकरार तेज़ हो गई।
- पी. चिदंबरम ने BRICS के व्यावहारिक लाभों पर संदेह जताया
- शशि थरूर ने पाँच ठोस लाभों की सूची प्रस्तुत की
- बजपा ने कांग्रेस पर भारत की वैश्विक भूमिका को कम आंकने का आरोप लगाया
नई दिल्ली – वित्त मंत्री पद से हटे पूर्व कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने हालिया BRICS शिखर सम्मेलन के बाद भारत को मिलने वाले आर्थिक और रणनीतिक लाभों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत को अब तक कोई स्पष्ट, मापने योग्य लाभ नहीं मिला है।
इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ विदेश मंत्री शशि थरूर ने उत्तर देते हुए पाँच प्रमुख लाभों की सूची दी। थरूर ने कहा कि भारत को नई तकनीक, वैकल्पिक ऊर्जा, व्यापार के अवसर, विकासशील बुनियादी ढाँचा और रणनीतिक सहयोग में लाभ मिल रहा है।
बजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबिन ने चिदंबरम की टिप्पणी को “राजनीतिक खेल” करार दिया और कहा कि कांग्रेस भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने थरूर के बिंदुओं को “स्पष्ट और ठोस” बताया।
Historical Background
BRICS (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का गठन 2006 में हुआ और 2012 में प्रथम शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। भारत ने 2012 से इस मंच पर सक्रिय भूमिका निभाई है, लेकिन पिछले दो शिखर सम्मेलनों में कई सदस्य देशों ने भारत को विशेष आर्थिक लाभ प्रदान करने का वादा किया, जो अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the debate highlights a deeper rift within Indian politics regarding the country's multilateral strategy and its ability to translate global forums into tangible domestic gains.
“BRICS के मंच से मिलने वाले लाभों को मापना कठिन है, लेकिन रणनीतिक साझेदारी का मूल्य अनदेखा नहीं किया जा सकता,” एक अंतर्राष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ ने कहा।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या BRICS सदस्य देशों के साथ व्यापार में वृद्धि हुई है?
A: हाँ, पिछले पाँच वर्षों में भारत‑BRICS व्यापार में लगभग 12% वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई है।
Q2: क्या भारत को BRICS से कोई वित्तीय सहायता मिली है?
A: अभी तक कोई प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता नहीं मिली, लेकिन कई परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहयोग और निवेश के वादे हुए हैं।