पूर्व सांसद एम. रामदास ने पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री एन. रंगसामी से इस दिशा में ठोस और साक्ष्य-आधारित अभियान चलाने का आह्वान किया है।

  • पूर्व सांसद एम. रामदास ने पुडुचेरी के राज्यत्व के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट की मांग की।
  • पुडुचेरी विधानसभा ने अब तक 16 प्रस्ताव पारित किए हैं।
  • राष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त और नीति संस्थान (NIPFP) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को शामिल करने का सुझाव।

पुडुचेरी के पूर्व सांसद और पुडुचेरी मानिला मक्कल मुन्नेत्र कझगम के अध्यक्ष एम. रामदास ने केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन से एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का आग्रह किया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य पुडुचेरी की राज्यत्व की मांग को न्यायसंगत ठहराने के लिए एक व्यापक व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार करना होगा।

रामदास ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात पर जोर दिया कि राज्य के दर्जे की यह मांग 1987 से लंबित है। उन्होंने याद दिलाया कि पुडुचेरी विधानसभा ने अब तक 16 अलग-अलग प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इस दिशा में कदम उठाने का अनुरोध किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पुडुचेरी की प्रशासनिक संरचना वर्तमान में केंद्र शासित प्रदेश के रूप में है, जिससे कई विधायी और वित्तीय सीमाएं उत्पन्न होती हैं। एक विस्तृत रिपोर्ट न केवल आर्थिक लाभों को उजागर करेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि राज्य बनने के बाद प्रशासनिक बाधाएं कैसे दूर होंगी।

पूर्व सांसद ने मुख्यमंत्री एन. रंगसामी की आलोचना करते हुए कहा कि राज्यत्व की मांग को केवल एक 'राजनीतिक नारा' नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को राष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त और नीति संस्थान (NIPFP) जैसे किसी राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान को नियुक्त करना चाहिए, जो पुडुचेरी की अर्थव्यवस्था, भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या और विधानसभा की सीमाओं का गहराई से विश्लेषण कर सके।

राज्यत्व केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्वायत्तता और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग है।

रामदास ने इस आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए निवासियों, सामाजिक संगठनों, ट्रेड यूनियनों, उद्योग निकायों और देश भर के राजनीतिक दलों के समर्थन को जुटाने का भी आह्वान किया। उनका तर्क है कि केंद्र पर निरंतर दबाव बनाने के लिए एक दस्तावेजी रोडमैप की आवश्यकता है।

क्या आप जानते हैं?: पुडुचेरी की राज्यत्व की मांग लगभग चार दशकों से अधिक समय से लंबित है, जो इसे भारत के सबसे पुराने लंबित राज्यत्व दावों में से एक बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. पुडुचेरी राज्यत्व की मांग कब से की जा रही है?
पुडुचेरी में राज्य के दर्जे की मांग आधिकारिक तौर पर 1987 से की जा रही है।

2. एम. रामदास ने किस संस्थान का सुझाव दिया है?
उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए राष्ट्रीय सार्वजनिक वित्त और नीति संस्थान (NIPFP) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का सुझाव दिया है।