ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लाभों को लेकर कांग्रेस के भीतर वैचारिक मतभेद उभर कर सामने आए हैं, जहाँ शशि थरूर ने पी. चिदंबरम के संदेहों को खारिज करते हुए इसे भारत का 'डिप्लोमैटिक पावर मूव' बताया है।
- शशि थरूर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को भारत की वैश्विक कूटनीतिक शक्ति के रूप में सराहा।
- पी. चिदंबरम ने सम्मेलन से होने वाले वास्तविक लाभों पर सवाल उठाए थे।
- बीजेपी ने इस आंतरिक कलह को कांग्रेस की 'नकारात्मकता' और भारत की प्रगति को न पचा पाने की अक्षमता बताया है।
भारतीय राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अपने ही दल के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम के विचारों से अलग जाते हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का पुरजोर समर्थन किया। थरूर ने इस सम्मेलन को केवल एक बैठक नहीं, बल्कि एक 'डिप्लोमैटिक पावर मूव' करार दिया है, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर सवाल उठाए कि ब्रिक्स जैसे समूह से भारत को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिल रहे हैं। चिदंबरम का तर्क था कि केवल शिखर सम्मेलनों का आयोजन करने से आर्थिक या रणनीतिक लाभ की गारंटी नहीं मिलती। हालांकि, थरूर ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मंचों की 'कन्विनिंग पावर' (एकत्र करने की शक्ति) अपने आप में एक बड़ी जीत है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this internal rift within the Congress party highlights a deeper struggle between the 'old guard' and the 'modernist' wing of the party regarding India's foreign policy. While the party officially critiques the current government, the inability to maintain a unified front on global diplomacy provides the ruling party with significant political ammunition.
"The divergence of opinion within the opposition on BRICS reflects the complexity of balancing national pride with political criticism."
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता नितिन नबीन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी भारत की वैश्विक प्रगति को पचा नहीं पा रही है और इसीलिए वह ब्रिक्स जैसे महत्वपूर्ण मंचों पर नकारात्मकता फैला रही है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस भारत के बढ़ते वैश्विक कद को स्वीकार करने में विफल रही है।
ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच प्रदान करने के लिए किया गया था। भारत ने हमेशा इस समूह का उपयोग ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज बनने के लिए किया है। थरूर का समर्थन इसी दिशा में है कि भारत को इन बहुपक्षीय मंचों का नेतृत्व करना चाहिए, चाहे सत्ता में कोई भी दल हो।
Frequently Asked Questions
1. शशि थरूर और पी. चिदंबरम के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य विवाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की उपयोगिता और भारत को इससे होने वाले लाभों को लेकर है।
2. बीजेपी ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
बीजेपी ने कहा है कि कांग्रेस भारत की वैश्विक सफलता और बढ़ते कद को स्वीकार नहीं कर पा रही है।