जॉइंट पार्लियामेंटरी कमेटी (JPC) ने 31‑सदस्यीय पैनल के साथ 18 सितंबर को पहली बैठक तय की, जहाँ गृह मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा संशोधित FCRA बिल की मुख्य धाराओं पर ब्रीफ़िंग दी जाएगी। विपक्ष इस बिल को अल्पसंख्यक‑चलित संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगा रहा है।

  • जॉइंट पार्लियामेंटरी कमेटी (JPC) 18 सितंबर को पहली बैठक करेगा।
  • होम मंत्रालय के अधिकारी संशोधित FCRA बिल की मुख्य धारा पर सदस्यों को ब्रीफ़ करेंगे।
  • बिल को विपक्ष ने अल्पसंख्यक संस्थाओं पर लक्षित करने का आरोप लगाया है।

पहली बैठक का विवरण

लोकसभा सचिवालय ने शुक्रवार, 11 सितंबर को जारी नोटिस के अनुसार, JPC की पहली बैठक 18 सितंबर को नई दिल्ली में होगी। इस बैठक में गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि बिल के प्रमुख प्रावधानों, निगरानी तंत्र और नियामक अधिकारों पर विस्तृत ब्रीफ़िंग देंगे।

बिल का मुख्य उद्देश्य

विदेशी योगदान (नियमन) संशोधन बिल, 2026, का उद्देश्य गैर‑सरकारी संगठनों (NGOs) और विदेशी फंडिंग पर सरकारी नियंत्रण को सख्त करना है। यह बिल मार्च 25 को लोकसभा में पेश किया गया था और अब तक संसद के मानसून सत्र में बहस का विषय बना हुआ है।

विपक्ष की चिंताएँ

विपक्ष ने विशेष रूप से "निर्दिष्ट प्राधिकारी" प्रावधान को चुनौती दी है, जिसके तहत यदि किसी NGO का FCRA प्रमाणपत्र रद्द, समर्पित या स्वतः समाप्त हो जाता है, तो उसकी विदेशी योगदान और उससे प्राप्त संपत्तियाँ बिना सुनवाई के सरकार के नियुक्त प्राधिकारी को सौंप दी जाएँगी। यह कदम संस्थाओं के पुनरुस्थापन के अधिकार को भी समाप्त कर देता है।

Historical Background

भारत ने 2020 में विदेशी फंडिंग पर व्यापक नियम लागू किए थे, जिससे NGOs की पारदर्शिता बढ़ी, परन्तु कई संगठनों ने नियामक दायरे को अत्यधिक कठोर बताया। इस पृष्ठभूमि में 2026 का संशोधन बिल अधिक कठोर नियंत्रण का प्रस्ताव रखता है, जिससे पिछले पाँच वर्षों की नीति‑परिवर्तन की दिशा स्पष्ट होती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the outcome of the JPC’s deliberations could reshape civil‑society funding in India, influencing everything from human‑rights advocacy to disaster‑relief operations.

"If the ‘designated authority’ clause remains unchecked, it could undermine the financial independence of NGOs across the country," says constitutional law expert Dr. Meera Sharma.
Did You Know?: 2020 में पहली बार भारत ने विदेशी फंडिंग पर व्यापक नियम लागू किए थे।

Frequently Asked Questions

Q1: JPC की रिपोर्ट कब प्रस्तुत की जाएगी?
A: समिति को विंटर सत्र के पहले सप्ताह के अंत तक अपनी रिपोर्ट लोकसभा में जमा करनी होगी।

Q2: यदि किसी NGO का प्रमाणपत्र रद्द हो जाता है तो उसके पास अपील करने का कोई विकल्प है?
A: वर्तमान प्रस्ताव में अपील प्रक्रिया को सीमित किया गया है, जिससे न्यायिक सुनवाई से पहले ही संपत्ति सरकार को हस्तांतरित हो सकती है।