11 सितंबर के हमलों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया ने कैसे दशकों तक निरर्थक युद्धों, नागरिक स्वतंत्रता के हनन और आधुनिक अस्तित्वगत खतरों की अनदेखी को जन्म दिया, इस पर एक गहन चिंतन।

  • 9/11 की प्रतिक्रिया ने अफगानिस्तान और इराक में दो दशकों लंबे महंगे युद्धों को जन्म दिया।
  • निगरानी और यातना के माध्यम से नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता किया गया।
  • जलवायु परिवर्तन और AI जैसे घरेलू संकटों के बजाय खरबों डॉलर सैन्य हस्तक्षेप पर खर्च किए गए।
  • लेखक का तर्क है कि 'आतंकवाद के खिलाफ युद्ध' ने अमेरिका को बाहरी दुश्मनों से अधिक आंतरिक नुकसान पहुँचाया।

11 सितंबर, 2001 की उस सुबह को बीते 25 साल हो चुके हैं, जिसने वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। जबकि अल कायदा के हमलों ने अमेरिकी धरती पर एक अभूतपूर्व प्रहार किया था, लेकिन विश्लेषण बताते हैं कि बुश प्रशासन द्वारा की गई प्रतिक्रिया ने अमेरिका को उस त्रासदी से कहीं अधिक दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाया।

हमलों के तुरंत बाद देश में एकता की लहर देखी गई, लेकिन इसका उपयोग एक पूर्व-निर्धारित सैन्य एजेंडे को उचित ठहराने के लिए किया गया। विशेष रूप से इराक पर आक्रमण को एक 'पसंद के युद्ध' (war of choice) के रूप में देखा जाता है—एक ऐसी रणनीतिक भूल जो गलत खुफिया जानकारी और शासन परिवर्तन की इच्छा पर आधारित थी, जिसका 9/11 के वास्तविक दोषियों से कोई लेना-देना नहीं था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 9/11 के बाद अपनाए गए 'सुरक्षा-प्रथम' दृष्टिकोण ने न केवल विदेशों में अस्थिरता पैदा की, बल्कि इसे घरेलू स्तर पर भी आयात किया। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के गठन और स्थानीय पुलिस के सैन्यीकरण ने अमेरिकी सामाजिक अनुबंध को स्वतंत्रता से हटाकर संदेह की ओर मोड़ दिया। इन युद्धों की अवसर लागत—खरबों डॉलर और लाखों जीवन—बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा और तकनीक में निवेश का एक खोया हुआ अवसर है।

हालिया अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी आपदा ने इस महाशक्ति को कुछ नहीं सिखाया, क्योंकि यह अपनी वर्तमान विदेश नीति में उन्हीं रणनीतिक गलतियों को दोहरा रहा है।

सैन्य विफलताओं के अलावा, नैतिक कीमत भी बहुत अधिक थी। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर यातना (torture) की वापसी और निगरानी शक्तियों के विस्तार ने उन्हीं लोकतांत्रिक मूल्यों को नष्ट कर दिया जिन्हें अमेरिका दुनिया में बचाने का दावा कर रहा था। इस पाखंड ने अमेरिका की वैश्विक छवि को धूमिल किया और दुनिया भर के सत्तावादी शासकों को अपने विरोधियों को दबाने का बहाना दिया।

उस युग के दो प्रमुख संघर्षों की तुलना एक स्पष्ट अंतर दिखाती है:

विशेषताअफगानिस्तान युद्धइराक युद्ध
मुख्य प्रेरणाआतंकवाद विरोधी/अल कायदाशासन परिवर्तन/रणनीतिक नियंत्रण
अंतरराष्ट्रीय सहमतिव्यापक समर्थनअत्यधिक विवादास्पद
परिणाम20 साल का कब्जा; तालिबान की वापसीराज्य का पतन; क्षेत्रीय अस्थिरता

आज, अमेरिका के सामने जलवायु परिवर्तन, महामारी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से उदय जैसे नए अस्तित्वगत खतरे हैं। हालांकि, 9/11 के बाद पैदा हुई संस्थागत जड़ता अभी भी मानवीय सुरक्षा के बजाय सैन्य प्रभुत्व को प्राथमिकता देती है, जिससे राष्ट्र उन गैर-पारंपरिक खतरों के प्रति संवेदनशील हो गया है जिन्हें मिसाइलों से नहीं जीता जा सकता।

क्या आप जानते हैं?: इराक और अफगानिस्तान के बाद के युद्धों में जितने अमेरिकी मारे गए, वह संख्या 9/11 के आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों से दोगुनी से भी अधिक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या 9/11 हमलों में इराक शामिल था?
नहीं, इस बात का कोई सबूत नहीं था कि अल कायदा के 9/11 ऑपरेशन का इराकी सरकार से कोई संबंध था, बावजूद इसके कि बुश प्रशासन ने उन्हें जोड़ने की कोशिश की थी।

9/11 ने अमेरिका में घरेलू पुलिसिंग को कैसे बदला?
इसके कारण पुलिस का 'सैन्यीकरण' हुआ, जहाँ स्थानीय विभागों को शहरी युद्ध के लिए सैन्य-ग्रेड उपकरण और प्रशिक्षण मिलना शुरू हो गया।