बीजेपी सांसद राघव चड्ढा के मतदाता पंजीकरण को लेकर छिड़े विवाद ने एक पुराने कानूनी प्रावधान को चर्चा में ला दिया है। जानिए कैसे 2003 का एक संशोधन उन्हें दिल्ली का वोटर होने के बावजूद पंजाब का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति देता है।

  • राघव चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची से हटने के बाद अब दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया है।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में 2003 के संशोधन ने राज्यसभा उम्मीदवारों के लिए उस राज्य का निवासी होना अनिवार्य नहीं रखा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को बरकरार रखा है, जिससे अब भारत के किसी भी हिस्से का वोटर किसी भी राज्य से राज्यसभा जा सकता है।

नई दिल्ली की राजनीति में इन दिनों राघव चड्ढा के मतदाता पंजीकरण को लेकर काफी गहमागहमी है। पंजाब से राज्यसभा सांसद और हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची से हटा दिए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने दावा किया था कि वह अपनी सदस्यता खो सकते हैं। हालांकि, अब उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची में वापस आ गया है।

लेकिन यहाँ मुख्य सवाल यह उठता है कि क्या कोई व्यक्ति, जो उस राज्य का मतदाता नहीं है, राज्यसभा में उस राज्य का प्रतिनिधित्व कर सकता है? इसका जवाब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौर में किए गए एक महत्वपूर्ण विधायी बदलाव में छिपा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह कानूनी बदलाव राज्यसभा के मूल संघीय चरित्र को बदल देता है। अब राष्ट्रीय पार्टियां अपने बड़े नेताओं को बिना किसी स्थानीय निवास की बाधा के ऊपरी सदन में भेज सकती हैं। यह 'वोट देने के अधिकार' और 'प्रतिनिधित्व करने के अधिकार' के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है, जिसे आलोचक संघीय ढांचे का कमजोर होना मानते हैं।

ऐतिहासिक रूप से, 2003 तक जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 3 के तहत यह अनिवार्य था कि राज्यसभा उम्मीदवार उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का मतदाता हो जिसका वह प्रतिनिधित्व करना चाहता है। वाजपेयी सरकार ने इस प्रावधान को बदलते हुए "उस राज्य या क्षेत्र में" शब्दों को बदलकर "भारत में" कर दिया।

2003 का संशोधन राज्यसभा के चरित्र को 'निवास-आधारित' प्रतिनिधित्व से बदलकर 'योग्यता या पार्टी-रणनीति' आधारित प्रतिनिधित्व में ले आया।

चड्ढा का नाम 2 सितंबर को दिल्ली के राजिंदर नगर निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ा गया। हालांकि AAP ने इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया है, लेकिन कानूनी तौर पर चड्ढा की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है। कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति भारत में कहीं भी पंजीकृत मतदाता है, तो वह किसी भी राज्य से राज्यसभा का सदस्य बन सकता है।

विशेषता2003 से पहले का नियमवर्तमान नियम (2003 के बाद)
निवास की आवश्यकताप्रतिनिधित्व वाले राज्य का वोटर होना अनिवार्यभारत में कहीं भी वोटर होना पर्याप्त
पात्रता का आधारक्षेत्रीय जुड़ावराष्ट्रीय पात्रता
मुख्य उद्देश्यसंघीय प्रतिनिधित्वराष्ट्रीय नेतृत्व के लिए लचीलापन
क्या आप जानते हैं?: इस संशोधन को तत्कालीन कानून राज्य मंत्री पी.सी. थॉमस ने आगे बढ़ाया था, उनका तर्क था कि विधायकों को यह स्वतंत्रता होनी चाहिए कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को चुनें जो उनके राज्य के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए सबसे उपयुक्त हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राज्यसभा सांसद किसी दूसरे राज्य का वोटर हो सकता है?
हाँ, 2003 के संशोधन के बाद, सांसद के लिए केवल भारत का पंजीकृत मतदाता होना आवश्यक है, न कि उसी राज्य का जिसका वह प्रतिनिधित्व कर रहा है।

राघव चड्ढा के वोटर रजिस्ट्रेशन का विवाद क्या है?
उनका नाम पंजाब की सूची से 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' के रूप में हटा दिया गया था और बाद में फॉर्म 6 के माध्यम से दिल्ली की सूची में जोड़ा गया।