तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाले 'धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय विजय गठबंधन' में आंतरिक कलह की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं, विपक्षी डीएमके ने मुख्यमंत्री के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों और भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ आक्रामक रुख अपनाया है।

  • मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन में समन्वय की कमी और आंतरिक मतभेद उभर रहे हैं।
  • डीएमके ने मुख्यमंत्री के व्यवहार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर 12 सितंबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।
  • शासन में प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी है, जिसमें मुख्य सचिव और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले शामिल हैं।

तमिलनाडु की वर्तमान राजनीतिक स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में गठित 'धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय विजय गठबंधन' (Secular Social Justice Victory Alliance) बाहरी तौर पर मजबूत दिख रहा है, लेकिन अंदरूनी तौर पर यह गठबंधन बिखरता नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि गठबंधन के साथी केवल औपचारिक रूप से साथ हैं, लेकिन उनके बीच वैचारिक तालमेल का अभाव है।

विपक्षी दल डीएमके (DMK) ने मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ एक सोची-समझी रणनीति तैयार की है। डीएमके प्रमुख स्टालिन के प्रति मुख्यमंत्री के कथित अपमानजनक व्यवहार और हिरासत में प्रताड़ना (Custodial Torture) का मजाक उड़ाने के आरोपों को लेकर 12 सितंबर को पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके अलावा, डीएमके महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को मुद्दा बनाकर किसानों और मजदूरों को लामबंद करने की कोशिश कर रहा है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विजय की सरकार अब केवल चुनावी जीत के उत्साह पर निर्भर नहीं रह सकती। प्रशासनिक अनुभव की कमी और गठबंधन सहयोगियों के साथ बढ़ते मतभेद सरकार की स्थिरता के लिए खतरा बन सकते हैं। विशेष रूप से, रेड्डी भाइयों की भूमिका और उनके प्रभाव को लेकर उठ रहे सवाल सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं।

प्रशासनिक मोर्चे पर भी बड़े बदलाव होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विजय मुख्य सचिव साइकुमार को हटाने और उनके स्थान पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश लकानि या कृष्णन को नियुक्त करने पर विचार कर रहे हैं। यह कदम उन आरोपों के बाद उठाया जा रहा है जिनमें साइकुमार पर भाजपा के प्रति झुकाव होने का दावा किया गया है। साथ ही, कानून-व्यवस्था के एडीजीपी அன்பு के तबादले की भी तैयारी है।

तमिलनाडु की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ करिश्माई व्यक्तित्व और प्रशासनिक कुशलता के बीच सीधा टकराव है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बात करें तो, राज्यपाल कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच लंदन यात्रा को लेकर खींचतान देखी गई। राज्यपाल ने मलेशियाई प्रधानमंत्री की चेन्नई यात्रा के मद्देनजर यात्रा टालने का सुझाव दिया था, जिसे मुख्यमंत्री कार्यालय ने अस्वीकार कर दिया। हालांकि, विजय अब दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से मुलाकात कर तमिलनाडु के लिए अधिक वित्तीय सहायता की मांग करने की योजना बना रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, वर्तमान सरकार पिछली सरकार के दौरान कोयला खरीद और बिजली खरीद में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस जांच के जरिए डीएमके के कई बड़े नेताओं को मुश्किल में डाला जा सकता है।

क्या आप जानते हैं?: तमिलनाडु की राजनीति में अक्सर फिल्मी सितारों का प्रभाव रहा है, लेकिन वर्तमान सत्ता संघर्ष प्रशासनिक नियंत्रण और गठबंधन की राजनीति के बीच एक नया अध्याय लिख रहा है।

1. धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय विजय गठबंधन क्या है?
यह मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में विभिन्न राजनीतिक दलों का एक गठबंधन है, जिसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देना है।

2. डीएमके के विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या है?
डीएमके मुख्यमंत्री विजय के व्यवहार, हिरासत में प्रताड़ना के प्रति उनके दृष्टिकोण और राज्य की आर्थिक समस्याओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है।