अभिनेताओं ने 22‑30 सितम्बर के बीच कर्नाटक के 100 मतदान बूथों का सर्वेक्षण करने का ऐलान किया, ताकि विशेष तीव्र पुनरावृत्ति (SIR) को मनमानेपन के रूप में उजागर किया जा सके। उन्होंने इसे दिल्ली में जंतर mantar में राष्ट्रीय सार्वजनिक सुनवाई के रूप में प्रस्तुत करने की बात कही।
- प्रकाश राज 22‑30 सितम्बर तक कर्नाटक के 100 बूथों का सर्वेक्षण करेंगे
- SIR को ‘धोखा’ और ‘साजिश’ कहा गया
- साक्ष्य 15 अक्टूबर को जंतर mantar में सार्वजनिक सुनवाई में पेश होंगे
बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिनेता प्रकाश राज ने विशेष तीव्र पुनरावृत्ति (SIR) को "धोखा" और "साजिश" घोषित किया। उन्होंने बताया कि 22 से 30 सितंबर तक वह कर्नाटक के 100 मतदान बूथों का दौरा करेंगे और इस प्रक्रिया की मनमानी को दस्तावेज़ करेंगे। ये साक्ष्य 15 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर mantar में राष्ट्रीय सार्वजनिक सुनवाई में प्रस्तुत किए जाएंगे।
राज ने कहा कि वह इस लड़ाई को कानूनी रूप से भी आगे बढ़ाएंगे, सभी साक्ष्य एकत्र करने के बाद विभिन्न अदालतों में दाखिल करेंगे। वह और नागरिक समाज समूह प्रत्येक बूथ पर जाकर यह जांचेंगे कि मतदाता कैसे ‘अनुपस्थित’, ‘स्थानांतरित’, ‘डुप्लिकेट’ या ‘मृत’ सूची (ASDDO) में शामिल हुए और नोटिस फॉर्म में कोई त्रुटि तो नहीं है।
उन्होंने चुनाव आयोग के वीआईपी सूची में शामिल शिला राजकुमार जैसे प्रमुख हस्तियों को विशेष उपचार मिलने की आलोचना की और कहा कि यह आम नागरिक के प्रति स्पष्ट पक्षपात है। "क्या इसका मतलब है कि लोकप्रियता के कारण विशेष अधिकार मिलते हैं?" उन्होंने सवाल उठाया।
राज ने सभी राजनीतिक दलों की निंदा करते हुए कहा, "राहुल गांधी से लेकर नरेंद्र मोदी तक, सभी चुनाव के समय बिरयानी के पैकेट बांटते हैं, लेकिन जब आम जनता को मदद की जरूरत होती है, तो वे पीछे हटते हैं।" उन्होंने लोकतंत्र में वोटर की स्वतंत्रता को खतरे में डालने की चेतावनी दी।
विशेष रूप से उन्होंने SIR के फॉर्म‑6 में मौजूद झूठे बयान को उजागर किया, जिसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति गलत बयान देता है तो उसे दंडित किया जाएगा। इस प्रक्रिया से मतदाता स्वयं को ‘आपराधिक’ बना रहे हैं, यह उनका तर्क है।
अभिनेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों को दी गई कानूनी इम्युनिटी को भी सवालों के घेरे में लाया। उन्होंने कहा, "यदि यह एक समावेशी प्रक्रिया होती, तो इस तरह की तेज़ी से लागू नहीं की जाती।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that यदि SIR में वास्तविक मनमानी उजागर हो गई तो यह पूरे भारतीय चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को धक्का पहुंचा सकता है और भविष्य में सुधारात्मक कदमों को प्रेरित कर सकता है।
"SIR को वैध ठहराने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा है," कहा चुनाव विशेषज्ञ डॉ. अनीता सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रकाश राज का यह अभियान कब समाप्त होगा? यह 30 सितंबर को समाप्त होगा, जिसके बाद साक्ष्य 15 अक्टूबर को जंतर mantar में पेश किए जाएंगे।
SIR के खिलाफ कानूनी कदम क्या हैं? राज ने बताया कि वे सभी दस्तावेज़ एकत्र कर संबंधित उच्च न्यायालयों में याचिका दायर करेंगे।