AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने TVK पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार 'उधार की शक्ति' पर टिकी है। उन्होंने किसानों की समस्याओं और सत्ता के संघर्ष को लेकर सरकार को घेरा है।
- AIADMK प्रमुख ने TVK पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का गंभीर आरोप लगाया।
- दो AIADMK विधायकों के इस्तीफे के बाद मदुरंथकम और धरपुरम में उपचुनाव होंगे।
- पलानीस्वामी ने सरकार को 'borrowed government' (उधार की सरकार) करार दिया।
- किसानों के ऋण माफी वादे और धान खरीद में विफलता को लेकर सरकार पर हमला।
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। AIADMK के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने रविवार को TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) पर सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक 'हॉर्स-ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) करने का सीधा आरोप लगाया है। तिरुचिरापल्ली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए, पलानीस्वामी ने कहा कि वर्तमान सरकार अपनी शक्ति पर नहीं, बल्कि सहयोगियों के भरोसे चल रही है।
पलानीस्वामी ने इस आरोप को हाल ही में दो AIADMK विधायकों के इस्तीफे से जोड़ा, जिसके कारण मदुरंथकम और धरपुरम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की स्थिति पैदा हो गई है। चुनाव आयोग ने इन सीटों के लिए 6 अक्टूबर को मतदान निर्धारित किया है। पलानीस्वामी का दावा है कि इन विधायकों को लुभाने के लिए 'सड़क पर खेलते बच्चों को टॉफी दिखाकर बहलाने' जैसी रणनीति अपनाई गई है ताकि सत्ता का संतुलन बना रहे।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि तमिलनाडु में सत्ता का समीकरण तेजी से बदल रहा है। TVK का उदय पारंपरिक दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। यदि पलानीस्वामी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल राज्य की राजनीति बल्कि लोकतांत्रिक शुचिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। उपचुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या TVK की पकड़ मजबूत हो रही है या AIADMK फिर से वापसी करेगी।
"यह सरकार अपनी पैरों पर खड़ी नहीं है; यह उधार ली गई ताकत के सहारे जीवित है। यदि गठबंधन सहयोगी समर्थन वापस ले लेते हैं, तो यह शासन तुरंत ढह जाएगा।" - एडप्पाडी के. पलानीस्वामी
सत्ता के संघर्ष के साथ-साथ, पलानीस्वामी ने कृषि संकट को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि TVK ने पांच एकड़ तक के किसानों के लिए फसल ऋण माफी का वादा किया था, लेकिन बाद में कड़े नियमों के जरिए इस योजना को सीमित कर दिया। इसके अलावा, धान की समय पर खरीद न होने के कारण कटाई के बाद फसलें बेमौसम बारिश में बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं।
पलानीस्वामी ने अपनी सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि उनके समय में कौवेरी डेल्टा को 'संरक्षित कृषि क्षेत्र' घोषित किया गया था और किसानों को चौबीसों घंटे बिजली प्रदान की गई थी। उन्होंने वर्तमान सरकार की औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की क्षमता और बढ़ती आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी सवाल उठाए।
Frequently Asked Questions
1. मदुरंथकम और धरपुरम में उपचुनाव कब होंगे?
चुनाव आयोग के अनुसार, इन सीटों पर मतदान 6 अक्टूबर को निर्धारित है।
2. पलानीस्वामी ने सरकार को 'उधार की सरकार' क्यों कहा?
उनका मानना है कि सरकार के पास अपना मजबूत आधार नहीं है और वह केवल गठबंधन सहयोगियों के समर्थन पर टिकी है।