पश्चिम बंगाल की सुवेंदु सरकार ने हावड़ा, पुरुलिया, उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर में अक्षय पात्र फाउंडेशन को मिड-डे मील देने की अनुमति वापस ले ली है। लागत बढ़ने और विवादों के बीच यह निर्णय लिया गया है।
- पश्चिम बंगाल सरकार ने चार प्रमुख जिलों में अक्षय पात्र फाउंडेशन के मिड-डे मील आदेश को रद्द कर दिया है।
- लागत में वृद्धि और अंडों के वितरण के नए नियमों के कारण यह निर्णय लिया गया।
- ISKCON ने स्पष्ट किया है कि वह अक्षय पात्र फाउंडेशन से कानूनी रूप से जुड़ा नहीं है।
पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक उलटफेर करते हुए हावड़ा, पुरुलिया, उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर जिलों में मिड-डे मील (दोपहर का भोजन) योजना के लिए अक्षय पात्र फाउंडेशन को दी गई मंजूरी को वापस ले लिया है। मात्र तीन सप्ताह पहले दिए गए इस आदेश को राज्य शिक्षा विभाग ने आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया है।
शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव परोमिता रॉय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद अक्षय पात्र फाउंडेशन को PM-POSHAN योजना के तहत भोजन प्रदान करने की अनुमति को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है। यह निर्णय उस समय आया है जब राज्य में भोजन के मेनू और पोषण संबंधी मानकों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ी हुई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि वित्तीय और राजनीतिक भी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में स्कूल के भोजन में अंडे शामिल करने का निर्णय लिया था ताकि बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके। हालांकि, इस बदलाव ने भोजन की प्रति थाली लागत को काफी बढ़ा दिया है, जिससे सरकार के बजट पर दबाव पड़ा है।
लागत प्रबंधन और पोषण संबंधी मानकों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
इस पूरे मामले में ISKCON की भूमिका भी विवादों के केंद्र में रही है। हालांकि अक्षय पात्र फाउंडेशन को ISKCON से जुड़ा माना जा रहा था, लेकिन संस्था ने स्वयं एक पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि उनका अक्षय पात्र या अन्नामृता फाउंडेशन के साथ कोई कानूनी संबंध नहीं है। ISKCON ने कहा कि ये दोनों संगठन उनके प्रबंधन बोर्ड से पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील योजना लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रही है। हाल ही में सरकार ने कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में भोजन वितरण की जिम्मेदारी ISKCON से जुड़ी संस्थाओं को सौंपने का प्रयास किया था, जिसे लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की गई थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. किन जिलों को इस आदेश से प्रभावित किया गया है?
हावड़ा, पुरुलिया, उत्तर 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर।
2. सरकार ने यह आदेश क्यों वापस लिया?
मुख्य रूप से भोजन की बढ़ती लागत और अंडों के वितरण के नए नियमों के कारण।