तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन की 'मेयर केयर' योजना को लेकर विपक्ष ने गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ओणम किट और स्कूल किट के वितरण में अनियमितताओं के चलते अब विजिलेंस जांच की मांग उठ रही है।
- 'मेयर केयर' योजना के तहत किट वितरण में भारी अनियमितता के आरोप।
- विपक्ष (LDF और UDF) ने विजिलेंस जांच की मांग की।
- व्यापारिक प्रतिष्ठानों से दान और उपहार लेने पर सवाल।
- RTI से खुलासा: घोषित लाभार्थियों की तुलना में बहुत कम लोगों को मिली किट।
तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन की भाजपा नेतृत्व वाली प्रशासन की महत्वाकांक्षी 'मेयर केयर' योजना अब विवादों के घेरे में है। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) दोनों ही विपक्षी गुटों ने इस योजना के तहत ओणम किट और स्कूल किट के वितरण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए विजिलेंस जांच की मांग की है।
विवाद की जड़ में वह तरीका है जिससे ये किट एकत्र की गईं। आरोप है कि कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों के लिए ओणम किट और छात्रों के लिए स्कूल किट शहर के बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से उपहार और दान मांगकर तैयार की गई थी। LDF ने आरोप लगाया कि मेयर वी.वी. राजेश ने लाखों रुपये के उपहार स्वीकार किए, जो सत्ता का दुरुपयोग है।
विपक्ष के गंभीर आरोप और RTI का खुलासा
UDF संसदीय दल के नेता के.एस. सारिनाथन ने सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से चौंकाने वाले तथ्य पेश किए हैं। उन्होंने बताया कि जून में स्कूलों के खुलने पर 'मेयर केयर' के तहत 10,000 छात्रों को किट देने की घोषणा की गई थी, लेकिन वास्तव में केवल 4,000 छात्रों को ही इनका लाभ मिल सका।
सारिनाथन ने आगे कहा कि इस पहल के आय-व्यय का कोई आधिकारिक विवरण परिषद के सामने नहीं रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि व्यापारियों को यह विश्वास दिलाकर धन एकत्र किया गया कि यह कॉर्पोरेशन का आधिकारिक कार्यक्रम है, क्योंकि मांग पत्र मेयर के आधिकारिक लेटरहेड पर जारी किए गए थे।
प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी और आधिकारिक लेटरहेड का उपयोग करके निजी चंदा इकट्ठा करना गंभीर नैतिक और कानूनी प्रश्न खड़े करता है।
सत्ता का दुरुपयोग और जबरन वसूली के आरोप
LDF संसदीय दल के नेता एस.पी. दीपक ने और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कई निजी व्यक्तियों और छोटे व्यापारियों को दान देने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो व्यापारी योगदान देने से इनकार करते थे, उनके खिलाफ निरीक्षण के नाम पर कार्रवाई की जाती थी।
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह मामला केवल किट वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने और अवैध निर्माणों को संरक्षण देने जैसे राजनीतिक लाभ के आरोप भी शामिल हैं।
मेयर का बचाव
दूसरी ओर, मेयर वी.वी. राजेश ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि चूंकि इस योजना के लिए कॉर्पोरेशन के खजाने से कोई पैसा खर्च नहीं किया गया था, इसलिए परिषद के सामने वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल विभिन्न संस्थानों द्वारा प्रदान की गई किट को लाभार्थियों तक पहुँचाने का माध्यम बना है।
ऐतिहासिक संदर्भ: केरल में स्थानीय प्रशासन और पारदर्शिता
केरल के नगर निकायों में हाल के वर्षों में सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर राजनीतिक खींचतान बढ़ी है। स्थानीय निकायों द्वारा निजी दान पर निर्भरता अक्सर पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों पर बहस छेड़ती है।
Frequently Asked Questions
1. 'मेयर केयर' योजना क्या है?
यह तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन की एक पहल है जिसका उद्देश्य कर्मचारियों और छात्रों को किट प्रदान करना है।
2. विपक्ष विजिलेंस जांच की मांग क्यों कर रहा है?
किट वितरण के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से लिए गए धन और उपहारों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी के कारण।