अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले मेल-इन बैलेट (डाक द्वारा मतदान) पर प्रतिबंध लगाने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना को रोक दिया है। कोर्ट ने एक संघीय न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसने डाक सेवा के नए नियमों पर अस्थायी रोक लगा दी थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की मेल-इन बैलेट प्रतिबंध योजना पर अस्थायी रोक को बरकरार रखा है।
- न्यायाधीश ब्रेत् कावानाउ ने कहा कि चुनाव के समय इन नियमों को लागू करना 'मनमाना' होगा।
- ट्रंप का तर्क था कि ये नियम चुनावी धोखाधड़ी को रोकने के लिए आवश्यक हैं।
- 23 राज्यों और वाशिंगटन डीसी ने इस कार्यकारी आदेश को चुनौती दी थी।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस योजना को झटका दिया है, जिसके तहत नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले डाक द्वारा मतदान (mail-in ballots) को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा था। अदालत ने एक संघीय न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसने यूएस पोस्टल सर्विस (USPS) को डाक बैलेट के लिए नए नियम लागू करने से अस्थायी रूप से रोक दिया था।
इस मामले में कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। रूढ़िवादी न्यायाधीश ब्रेट कावानाउ ने फैसले का समर्थन तो किया, लेकिन संकेत दिया कि मुकदमेबाजी जारी रहने पर वे भविष्य में ट्रंप के पक्ष में निर्णय ले सकते हैं। कावानाउ के अनुसार, हालांकि डाक सेवा के पास अधिकार हो सकते हैं, लेकिन 2026 के चुनावों में इन नियमों को लागू करना 'मनमाना और तर्कहीन' (arbitrary and capricious) होगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला अमेरिकी लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की सुगमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इन नियमों को लागू किया जाता, तो लाखों मतदाताओं, विशेष रूप से डेमोक्रेटिक समर्थकों के लिए मतदान करना कठिन हो जाता, क्योंकि पिछले चुनावों में लगभग 30% मतदाताओं ने डाक बैलेट का उपयोग किया था।
चुनावों के ठीक पहले नियमों में बदलाव करना मतदाताओं के मताधिकार का उल्लंघन कर सकता है।
मार्च में जारी एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से, राष्ट्रपति ट्रंप ने USPS को निर्देश दिया था कि वे केवल उन नागरिकों को बैलेट भेजें जो विशिष्ट सूचियों में शामिल हैं। उन्होंने बैलेट लिफाफों पर अद्वितीय बारकोड का उपयोग करने और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जानकारी साझा करने की भी मांग की थी। हालांकि, कई राज्यों का तर्क है कि यह राज्यों के अपने चुनाव संचालित करने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
न्यायाधीश इंदिरा तलवानी ने पहले ही इन उपायों को रोकने के लिए एक निषेधाज्ञा जारी की थी, यह कहते हुए कि चुनावों के इतने करीब इन नियमों को लागू करने से मतदाताओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा सकता है। दूसरी ओर, न्यायाधीश सैमुअल एलिटो और क्लैरेंस थॉमस ने इस फैसले का विरोध किया और इसे ट्रंप प्रशासन के खिलाफ एक 'अंतिम प्रयास' (Hail Mary pass) करार दिया।
Historical Background
डोनाल्ड ट्रंप ने लंबे समय से डाक द्वारा मतदान की पद्धति पर सवाल उठाए हैं और बिना किसी ठोस सबूत के चुनावी धोखाधड़ी के दावे किए हैं। इससे पहले जून में भी सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चुनाव के दिन तक पोस्टमार्क किए गए बैलेट गिनने की अनुमति दी थी, जो ट्रंप प्रशासन के लिए एक और बड़ी हार थी।
Frequently Asked Questions
1. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला क्या दर्शाता है?
यह फैसला सुनिश्चित करता है कि चुनावों के ठीक पहले मतदान प्रक्रिया में अचानक बदलाव न हो, जिससे मतदाता भ्रमित न हों।
2. ट्रंप प्रशासन का मुख्य तर्क क्या था?
प्रशासन का तर्क है कि नए नियम चुनावी धोखाधड़ी को रोकने के लिए आवश्यक हैं और USPS के पास नियम बनाने का अधिकार है।