अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन को आव्रजन नीतियों को लेकर दो महत्वपूर्ण कानूनी झटकों का सामना करना पड़ा है। एक संघीय न्यायाधीश ने वीजा सीमा पर रोक लगा दी है, जबकि डेमोक्रेटिक राज्यों ने ग्रीन कार्ड प्रतिबंधों को चुनौती दी है।

  • बोस्टन के एक संघीय न्यायाधीश ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पत्रकारों के लिए प्रस्तावित वीजा समय सीमा पर रोक लगा दी है।
  • 22 राज्यों और डीसी के एक गठबंधन ने ग्रीन कार्ड के लिए 'पब्लिक चार्ज' नियमों को चुनौती दी है।
  • न्यायालय ने प्रशासन के तर्क को 'अत्यधिक कमजोर' करार दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन को उनकी सख्त आव्रजन (immigration) कार्यसूची के खिलाफ दोहरे कानूनी झटकों का सामना करना पड़ा है। सोमवार को, एक संघीय न्यायाधीश ने प्रशासन को अंतरराष्ट्रीय छात्रों और पत्रकारों के लिए निवास की अवधि पर निश्चित समय सीमा लागू करने से रोक दिया। इसी के साथ, डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों के एक बड़े गठबंधन ने एक अलग संघीय नियम के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जो सार्वजनिक लाभों का उपयोग करने वाले प्रवासियों को ग्रीन कार्ड देने से रोकने की अनुमति देता है।

वीजा कैप पर अदालत की रोक

होमलैंड सुरक्षा विभाग (DHS) के उस नियम को बोस्टन में अमेरिकी जिला न्यायाधीश एफ. डेनिस सैलर IV ने टाल दिया, जिसे मंगलवार को लागू होना था। यह आदेश ट्रेड यूनियनों और उच्च शिक्षा वकालत समूहों द्वारा मांगी गई निषेधाज्ञा के बाद आया। ट्रम्प के प्रस्ताव के तहत, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए F वीजा और सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रमों के लिए J वीजा को चार साल तक सीमित कर दिया जाना था। वहीं, पत्रकारों के लिए I वीजा को केवल 240 दिनों तक सीमित करने की योजना थी।

न्यायाधीश सैलर ने राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के नाम पर DHS द्वारा दिए गए तर्कों को "अत्यधिक कमजोर" बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा प्रणाली ने लाखों विद्वानों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान देने की अनुमति दी है और इन प्रतिबंधों से उच्च शिक्षा और अर्थव्यवस्था को "विनाशकारी" नुकसान हो सकता है। यह निर्णय लगभग 16 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों और 5 लाख विनिमय आगंतुकों को प्रभावित करता।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि ये कानूनी बाधाएं ट्रम्प प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और आव्रजन नियंत्रण के बीच एक बड़े संघर्ष को रेखांकित करती हैं। यदि ये नियम लागू होते, तो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रतिभा का पलायन होता और वैश्विक मीडिया कवरेज प्रभावित होता।

न्यायाधीश सैलर ने स्पष्ट किया कि मौजूदा वीजा प्रणाली ने आर्थिक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे नष्ट करना देश के लिए हानिकारक होगा।

'पब्लिक चार्ज' नियम को राज्यों की चुनौती

मैनहट्टन की एक संघीय अदालत में दो मुकदमे दायर किए गए हैं जो DHS के उस नियम को रोकने की कोशिश कर रहे हैं जो शुक्रवार को प्रभावी होने वाला था। यह नियम आव्रजन अधिकारियों को उन आवेदकों को अयोग्य घोषित करने की अनुमति देता है जो सार्वजनिक सहायता (public benefits) का उपयोग करते हैं। न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और इलिनोइस जैसे 22 राज्यों ने इस नीति को रोकने के लिए मुकदमा दायर किया है।

ट्रम्प प्रशासन उन नीतियों को फिर से लागू करना चाहता है जो गैर-नकद सहायता (जैसे खाद्य सहायता और मेडिकेड) को ग्रीन कार्ड के लिए अयोग्य कारक मानती हैं। राज्यों का तर्क है कि प्रशासन ने कांग्रेस की शक्तियों का अतिक्रमण किया है, क्योंकि स्थायी निवास के मानदंड निर्धारित करने का अधिकार केवल संसद के पास है।

Did You Know?: अमेरिका में F वीजा मुख्य रूप से उन छात्रों को दिया जाता है जो शैक्षणिक संस्थानों में पूर्णकालिक अध्ययन करते हैं।

Frequently Asked Questions

1. अदालत ने किस वीजा पर रोक लगाई है?
अदालत ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों (F वीजा), विनिमय आगंतुकों (J वीजा) और पत्रकारों (I वीजा) के लिए प्रस्तावित समय सीमा पर रोक लगा दी है।

2. 'पब्लिक चार्ज' नियम क्या है?
यह एक कानूनी मानक है जिसका उपयोग यह तय करने के लिए किया जाता है कि क्या कोई अप्रवासी सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर हो जाएगा।