दक्षिण पश्चिम रेलवे का मैसूरु डिवीजन 11 अगस्त से सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड घाट सेक्शन में वंदे भारत एक्सप्रेस का परीक्षण शुरू करने जा रहा है। यह परीक्षण बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच हाई-स्पीड सेवा शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बातें
- वंदे भारत का ट्रायल रन 11 अगस्त से 22 अगस्त तक चलेगा।
- चेन्नई के ICF द्वारा विशेष AEB सिस्टम युक्त 20-कोच वाला रेक उपलब्ध कराया गया है।
- यह परीक्षण बेंगलुरु-मंगलुरु रेल मार्ग पर सेवा शुरू करने के लिए अनिवार्य है।
- घाट सेक्शन की ढलान के कारण AEB तकनीक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूरु डिवीजन ने आखिरकार बेंगलुरु-मंगलुरु के बीच बहुप्रतीक्षित वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। रेलवे ने घोषणा की है कि सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड घाट सेक्शन में वंदे भारत का ट्रायल रन 11 अगस्त से शुरू किया जाएगा।
इस विशेष ट्रेन के लिए चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने एक अत्याधुनिक 20-कोच वाला रेक तैयार किया है, जो ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) सिस्टम से लैस है। वर्तमान में यह रेक मंड्या जिले के पांडवपुरा रेलवे स्टेशन पर खड़ा है। ट्रायल रन के दौरान रिसर्च, डिजाइन एंड सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की एक विशेषज्ञ टीम सुरक्षा मानकों की जांच करेगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस घाट सेक्शन की भौगोलिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। यहाँ रेलवे ट्रैक का ढलान (gradient) 1 में 50 है, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से ट्रेनों की गति 30 किमी प्रति घंटा तक सीमित रखी जाती है। पारंपरिक ट्रेनों में 'बैंकर लोको' (अतिरिक्त इंजन) का उपयोग किया जाता है, लेकिन वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों के साथ यह प्रक्रिया समय लेने वाली और तकनीकी रूप से जटिल हो सकती है।
AEB तकनीक के बिना इस कठिन घाट क्षेत्र में वंदे भारत का संचालन सुरक्षित रूप से संभव नहीं था।
AEB सिस्टम का मुख्य उद्देश्य ढलान पर ट्रेन की गति को नियंत्रित करना और आपातकालीन स्थिति में बिना किसी मानवीय देरी के स्वचालित रूप से ब्रेक लगाना है। इस तकनीक के आने से न केवल यात्रा सुरक्षित होगी, बल्कि समय की बचत भी होगी, जो वंदे भारत का मुख्य उद्देश्य है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सकलेशपुर-सुब्रमण्य रोड घाट सेक्शन पश्चिमी घाट की कठिन पहाड़ियों से होकर गुजरता है। यह खंड अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है लेकिन रेल संचालन के लिए सबसे कठिन क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहाँ की ढलान और घुमावदार ट्रैक के कारण दशकों से ट्रेनों की गति को सीमित रखा गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. वंदे भारत का ट्रायल कब तक चलेगा?
यह ट्रायल 11 अगस्त से शुरू होकर 22 अगस्त तक चलेगा।
2. AEB सिस्टम क्या है?
AEB का मतलब 'ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग' है, जो खतरे की स्थिति में ट्रेन को स्वचालित रूप से रोकता है।