रमनाथपुरम नगर पालिका ने जलस्रोत पर स्थित राजाकालियाम्मन मंदिर को ध्वस्त करने की योजना बनाई, परन्तु स्थानीय निवासियों और हिंदू मुन्नी के बड़े विरोध ने इस कदम को रोक दिया। कोर्ट की सुनवाई के दौरान एक हफ्ते का स्थगन दिया गया, जिससे भविष्य की कार्रवाई का मार्ग तय होगा।
रमनाथपुरम के राजा मलैयित्तु सड़क पर स्थित श्री राजाकालियाम्मन मंदिर को जलस्रोत पर अनधिकृत निर्माण मानते हुए नगर पालिका ने ध्वस्त करने का आदेश दिया। यह कदम तब आया जब एक स्थानीय निवासी ने शिकायत दर्ज कराई कि मंदिर ओरानी (जलाशय) के ऊपर बना है, जिससे जल संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हो रहा है।
कानूनी पृष्ठभूमि और न्यायालय की भूमिका
नगर पालिका ने पहले ही 30 जून को ध्वस्त करने की नोटिस जारी कर दी थी। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने मदुरै बेंच, मद्रास हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, परन्तु सभी अदालतों ने जमीन की वर्गीकरण को देखते हुए इन अपीलों को खारिज कर दिया। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि जबकि मुख्य न्यायिक उपाय समाप्त हो गया है, फिर भी स्थानीय स्तर पर अपील करने की संभावना बनी हुई है।
प्रदर्शन और प्रतिरोध
बुधवार को नगर निगम के अधिकारियों, राजस्व कर्मचारियों और पुलिस के साथ एक खुदाई मशीन (एक्सकेवेटर) लाकर ध्वस्त करने का प्रयास किया गया। इस पर हिन्दू मुन्नी के जिला अध्यक्ष रामामूर्ती ने स्थानीय निवासियों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मशीन को रोक दिया। कई महिलाएँ मंदिर के भीतर बैठकर नारे लगाए और ध्वस्त होने से बचने की कोशिश की।
स्थगन और आगे की राह
तहसीलदार कैलिस्वरन, नगरपालिका आयुक्त प्रभाकरन और जनता के बीच हुए वार्ता के बाद अधिकारियों ने एक हफ्ते का स्थगन देने पर सहमति जताई। अब तक के निर्णय के अनुसार, जब तक रमनाथपुरम जिला सिविल कोर्ट का अंतिम आदेश नहीं आता, तब तक कोई भी ध्वस्त कार्य नहीं किया जाएगा। कोर्ट के आदेश के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
रामामूर्ती ने इस प्रशासनिक कदम को ‘अचानक और अनावश्यक’ कहा और कहा कि प्राचीन मंदिर को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे में उच्च अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इस घटना ने न केवल स्थानीय धार्मिक भावना को उजागर किया, बल्कि जलस्रोत संरक्षण के राष्ट्रीय कानूनों और स्थानीय विकास योजनाओं के बीच के टकराव को भी सामने लाया।
जैसे-जैसे अदालत का आदेश आने वाला है, रमनाथपुरम में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिये दोनों पक्षों को कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करना आवश्यक है। यह मामला भविष्य में समान विवादों के निपटारे के लिये एक मिसाल बन सकता है, जहाँ पर्यावरणीय संरक्षण और धार्मिक धरोहर दोनों को संतुलित किया जाना चाहिए।