दिंगडुिल के पालनी में स्थित अरुल्मिगु धंधायुथापानी स्वामी मठ की 1.35 एकड़ भूमि के फर्जी पंजीकरण को लेकर CB‑CID ने अपनी जाँच शुरू कर दी है। 15 पुलिस अधिकारियों की टीम ने मामले की तह तक पहुँचने के लिए कई दस्तावेज़ और गवाहों की पूछताछ की।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • CB‑CID ने पालनी मठ की जमीन के फर्जी पंजीकरण की जाँच शुरू की
  • 15 पुलिस अधिकारियों की टीम ने स्थल पर विस्तृत पूछताछ की
  • रजिस्ट्रेशन विभाग ने तीन‑सदस्यीय समिति बनाकर गहराई से जांच करने का आदेश दिया

दिंगडुिल जिले के पालनी में स्थित अरुल्मिगु धंधायुथापानी स्वामी मठ की 1.35 एकड़ जमीन को लेकर हाल ही में एक गंभीर दस्तावेज़ी धोखाधड़ी उजागर हुई है। राज्य के अपराध शाखा‑क्रिमिनल इन्क्विजिशन डिपार्टमेंट (CB‑CID) ने 16 जुलाई को इस मामले की औपचारिक जाँच शुरू की, जिससे इस धार्मिक संस्थान की संपत्ति सुरक्षा की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया।

जाँच टीम और प्रारम्भिक कार्रवाई

जांच को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस अजय थंगम के नेतृत्व में 15 अनुभवी पुलिस अधिकारियों की टास्क‑फ़ोर्स ने संभाला। टीम ने पालनी के स्थानीय पुलिस स्टेशन (अडिवरम) से सभी संबंधित फाइलें और शिकायतें प्राप्त करके, मठ के प्रबंधकों, रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों और पूर्व सस्पेंड किए गए उप‑रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन सुब्रमणियन से पूछताछ की।

पिछला न्यायिक निर्णय और वर्तमान स्थिति

जांच से पहले, मदुरै हाई कोर्ट के मदुरै बेंच ने 15 जुलाई को मठ द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर, 1.35 एकड़ जमीन के विवादित बिक्री दस्तावेज़ को निरस्त कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि यह दस्तावेज़ अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए तैयार किया गया था। इस निर्णय के बाद उप‑रजिस्ट्रार सुब्रमणियन ने एंटीसिपेटरी बाइल के लिए हाई कोर्ट में आवेदन किया, जबकि जिला रजिस्ट्रार सासिकाला को निलंबित कर दिया गया।

रजिस्ट्रेशन विभाग की विशेष समिति

रजिस्ट्रेशन विभाग ने इस मामले को सटीक रूप से सुलझाने के लिए एक तीन‑सदस्यीय समिति बनाई है, जिसमें अतिरिक्त इन्स्पेक्टर‑जनरल, सहायक इन्स्पेक्टर‑जनरल और जिला रजिस्ट्रार शामिल हैं। समिति को दस्तावेज़ों की जाँच, संबंधित उप‑रजिस्ट्रारों और सहायक कर्मचारियों के बयान, तथा कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने का निर्देश मिला है।

भविष्य की संभावनाएँ और सामाजिक प्रभाव

यदि CB‑CID की जांच में धोखाधड़ी सिद्ध होती है, तो मठ की 1.35 एकड़ भूमि को मूल रूप से भक्तों के उपयोग के लिए पुनर्स्थापित किया जा सकता है, जैसा कि राज्य सरकार ने पूर्व में वादा किया था। इस कदम से न केवल धार्मिक संस्थानों की संपत्ति सुरक्षा को बल मिलेगा, बल्कि भूमि पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। यह घटना तमिलनाडु में भूमि विवादों के समाधान हेतु एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है।