कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने सभी मंदिरों के दान बॉक्स को चार कैमरों से निगरानी में रखने का प्रस्ताव रखा। यह कदम आयोध्या और बद्रीनाथ में हुए दान चोरी के मामलों के बाद उठाया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कर्नाटक के सभी मंदिरों के दान बॉक्स को चार‑कोणीय CCTV कैमरों से निगरानी में रखा जाएगा।
- उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने पारदर्शी लेखा‑जोखा और दान के सही उपयोग की मांग की।
- लगभग 39,000 मंदिरों में से 200 ‘श्रेणी‑ए’ मंदिरों में ही लगभग ₹2,521 करोड़ की जमा राशि है।
कर्नाटक सरकार ने आयोध्या राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम में दान चोरी के आरोपों के बाद एक नया सुरक्षा प्रोटोकॉल घोषित किया है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य के सभी मंदिरों के दान बॉक्स को चार अलग‑अलग कोणों से दिखाने वाले CCTV कैमरों से निगरानी की जाएगी, जिससे चोरी की संभावना न्यूनतम हो सकेगी।
पृष्ठभूमि और कारण
पिछले कुछ महीनों में आयोध्या और उत्तराखंड में दान बॉक्स से कीमती सामान और नकद की चोरी के कई मामले सामने आए, जिससे भक्तों का विश्वास डगमगा गया। कर्नाटक में भी कई छोटे‑बड़े मंदिरों में दान की बड़ी मात्रा जमा होती है, परन्तु लेखा‑जोखा में पारदर्शिता की कमी के कारण कभी‑कभी अनियमितताओं की खबरें आती रहती हैं। इस पर सरकार ने तत्काल कदम उठाने का निर्णय लिया।
नयी निगरानी प्रणाली का विस्तार
कर्नाटक के मुज्राई विभाग के तहत लगभग 39,000 मंदिर आते हैं, जिनमें से 200 को ‘श्रेणी‑ए’ माना गया है क्योंकि इनका वार्षिक दान राजस्व बहुत अधिक है। इन मंदिरों के दान बॉक्स को चार CCTV कैमरों से कवर किया जाएगा, जिससे किसी भी अनधिकृत पहुंच या चोरी को तुरंत रिकॉर्ड किया जा सकेगा। साथ ही, एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जहाँ सभी फुटेज को रीयल‑टाइम में मॉनिटर किया जाएगा।
लेखा‑जोखा और निधियों का उपयोग
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि सभी मंदिरों को अब से “सही और पारदर्शी लेखा‑जोखा” रखना अनिवार्य होगा। श्रेणी‑ए मंदिरों में कुल जमा राशि लगभग ₹2,521 करोड़ है, जिसे केवल मंदिर के विकास कार्यों में ही उपयोग किया जाएगा। केवल 10% निधि का उपयोग ‘श्रेणी‑सी’ मंदिरों के विकास में किया जा सकता है, जबकि शेष 90% प्रत्येक मंदिर की अपनी आवश्यकताओं के लिए सुरक्षित रहेगा।
भविष्य की दिशा
सरकार ने बताया कि इस नई प्रणाली के साथ-साथ प्रत्येक मंदिर के लिए एक विस्तृत ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया जाएगा, जिससे संरचनात्मक सुधार, सुविधाओं का विस्तार और भक्तों के अनुभव को बेहतर बनाया जा सकेगा। यह कदम न केवल चोरी को रोकने के लिए बल्कि धार्मिक संस्थानों में विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।