तिरुपति बालाजी मंदिर में नई दान नीति लागू होने से ठीक पहले दानदाताओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे मात्र 24 घंटों में ₹96.98 करोड़ का रिकॉर्ड संग्रह हुआ।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने 24 घंटों में ₹96.98 करोड़ का ऐतिहासिक दान प्राप्त किया।
  • यह वृद्धि नई दान नीति लागू होने से पहले 'लाइफटाइम बेनिफिट्स' सुरक्षित करने की होड़ के कारण हुई।
  • नई नीति के तहत अब आजीवन सुविधाओं के बजाय 20 वर्षों तक के लिए विशेषाधिकार दिए जाएंगे।
  • मंदिर की कुल संपत्ति लगभग ₹3.38 लाख करोड़ आंकी गई है।

आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में मंगलवार को दान की एक अभूतपूर्व लहर देखी गई। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) बोर्ड ने मात्र 24 घंटों के भीतर ₹96.98 करोड़ का रिकॉर्ड संग्रह किया। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि नई दान नीति लागू होने की समयसीमा से पहले अपने पुराने विशेषाधिकारों को सुरक्षित करने की एक सामूहिक कोशिश थी।

नई नीति और दानदाताओं की होड़

15 जुलाई की मध्यरात्रि से लागू होने वाली नई नीति ने दानदाताओं के लिए नियमों को बदल दिया है। अब तक, बड़े दान देने वाले भक्तों को 'लाइफटाइम बेनिफिट्स' या आजीवन सुविधाएं प्राप्त होती थीं, जिनमें विशेष दर्शन, सुपाथम प्रवेश और कल्याणोत्सव में भागीदारी शामिल थी। हालांकि, नई नीति के तहत व्यक्तिगत दानदाताओं के लिए ये सुविधाएं अब केवल 20 वर्षों तक ही सीमित रहेंगी, जबकि संस्थानों के लिए यह अवधि 15 वर्ष होगी।

इसी कारण, मंगलवार को दानदाताओं की भारी भीड़ उमड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, 2,460 दानदाताओं ने योगदान दिया, जिनमें से दो लोगों ने ₹1 करोड़ से अधिक का दान दिया। 1,246 दानदाताओं ने ₹10-25 लाख के बीच राशि दी, जबकि 1,212 लोगों ने ₹1-10 लाख के बीच योगदान किया।

पारदर्शिता और प्रबंधन में बदलाव

TTD के अध्यक्ष बीआर नायडू के अनुसार, दानदाताओं की बढ़ती संख्या और प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से इन बदलावों की आवश्यकता महसूस की गई। नए नियमों के तहत, अब दान के लिए अलग-अलग स्लैब के बजाय चार श्रेणियों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, सभी दर्शन अब ऑनलाइन डोनर मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से संचालित होंगे, जिससे मानवीय हस्तक्षेप और विशेष अनुरोधों में कमी आएगी।

विश्व के सबसे अमीर मंदिरों में से एक

तिरुपति मंदिर न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि आर्थिक रूप से भी एक वैश्विक शक्ति है। इसकी अनुमानित शुद्ध संपत्ति लगभग ₹3.38 लाख करोड़ है, जो कई छोटे देशों की जीडीपी से भी अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, मंदिर की हुंडी में ₹1,738 करोड़ से अधिक का चढ़ावा आया, जो प्रतिदिन औसतन ₹4.75 करोड़ के बराबर है।